ऐसा लगा जैसे भूकंप आया हो : दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने के प्रत्यक्षदर्शी
ऐसा लगा जैसे भूकंप आया हो : दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने के प्रत्यक्षदर्शी
नयी दिल्ली, छह सितंबर (भाषा) दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को एक ‘‘अचानक धमाके’’ के बाद आसपास की इमारतों में रहने वाले लोग अपने घरों से बाहर निकले तो उन्हें छात्रों से गुलजार रहने वाले पीजी की जगह मलबे का ढेर नजर आया।
दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के प्रमुख इलाके के पास निजी छात्रावास, भोजनालयों और अन्य दुकानों वाली इस कालोनी में पांच मंजिला इमारत ‘हॉस्टल डेज’ ढहने के बाद मलबे में फंसे लोगों की मदद के लिये लोग अपने हाथों और उपलब्ध साधनों से राहत व बचाव कार्य में जुट गए।
दिल्ली पुलिस के साथ काम करने वाले स्थानीय निवासी राजेन छेत्री ने बताया कि इमारत में करीब 15 कमरे थे और प्रत्येक कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे। उन्होंने बताया कि बेसमेंट में मरम्मत या निर्माण कार्य जारी था।
छेत्री ने कहा, ‘‘यहां रहने वाले अधिकतर छात्र केरलम, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से हैं और मुख्य रूप से मोतीलाल नेहरू कॉलेज, आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज और श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में पढ़ते हैं। वे प्रति बिस्तर करीब 12,000 रुपये किराया दे रहे थे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं पिछले 20 वर्षों से यहां रह रहा हूं। बेसमेंट में कुछ निर्माण कार्य चल रहा था, जहां पानी जमा होने लगा था। नींव भी काफी कमजोर हो गई थी।’’
पुलिस ने एक बयान में बताया कि अपराह्न 1.34 बजे साउथ कैंपस थाने में नानकपुरा गुरुद्वारे के पास एक इमारत ढहने के संबंध में पुलिस नियंत्रण कक्ष (पीसीआर) को सूचना मिली।
एक स्थानीय निवासी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हमें अपने घर में हल्का झटका महसूस हुआ। ऐसा लगा जैसे जमीन हिल गई हो, जैसे भूकंप आया हो। हम बाहर भागे।’’
उन्होंने दावा किया कि तत्काल कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण स्थानीय लोगों ने खुद भारी कंक्रीट के स्लैब उठाने और मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया तथा अंदर फंसे लोगों की तलाश की।
स्थानीय निवासी ने दावा किया कि बगल की इमारत भी खतरे में दिखाई दे रही थी और वह थोड़ी झुकी हुई थी। उन्होंने आशंका जताई कि ढही इमारत के अंदर अब भी करीब 50 से 60 छात्र हो सकते हैं।
एक अन्य स्थानीय निवासी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि ऊपरी मंजिलों पर करीब 35 से 40 छात्र रह रहे थे और इमारत ढहने के समय उनमें से कुछ सो रहे थे। उन्होंने दावा किया कि बेसमेंट में काम चल रहा था और वह ढहने से कुछ मिनट पहले ही बाहर निकल पाए थे, इस दौरान उन्हें चोट भी आई। उन्होंने कहा, ‘‘जैसे ही मैं बाहर आया, पूरी इमारत ढह गई।’’
एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि उसका भतीजा इमारत ढहने से कुछ ही क्षण पहले बाइक से वहां से निकल गया था और बाल-बाल बचा। उन्होंने दावा किया कि उसके गुजरने के तुरंत बाद तेज आवाज के साथ इमारत ढह गई। उनके अनुसार, भतीजे ने कहा था, ‘‘यह कुछ सेकंड का मामला था।’’
एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि मलबे में फंसे कई छात्रों के केरलम से होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि रविवार होने के कारण कई छात्र कॉलेज नहीं गए थे और पीजी में ही मौजूद थे।
पिछले 20-22 वर्षों से इलाके में रहने वाली प्रियंका ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि इलाके में इमारतें पांच या छह मंजिल तक बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कई मकानों को लड़कों के पीजी में बदल दिया गया है और मालिक कहीं और चले गए हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वे बस संपत्तियों को पीजी का नाम देते हैं, किराया ऑनलाइन लेते हैं और उन्हें इसी तरह संचालित होने के लिए छोड़ देते हैं।’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘जो पीजी ढहा है, वह 20 साल से अधिक पुराना है और इतने वर्षों में मैंने यहां कोई रखरखाव का काम होते नहीं देखा। पूरा सत्य निकेतन पीजी से भरा हुआ है और मुश्किल से 30 प्रतिशत मकान मालिक ही यहां रहते हैं।’’
प्रियंका ने कहा, ‘‘यहां नालियां और सीवर तक खुले हैं। इमारत के अंदर कई छात्र फंसे हुए थे। बारिश हो रही थी, इसलिए अधिकतर छात्र अपने कमरों में थे, जबकि कुछ सप्ताहांत होने के कारण घर चले गए थे।’’
एक अन्य स्थानीय निवासी ने कहा कि इलाके की इमारतें काफी पुरानी हैं और ऐसी सभी संपत्तियों की संरचनात्मक जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इस आवासीय इलाके में बेसमेंट के साथ पांच मंजिला इमारतें बनाई गई हैं और सवाल किया कि क्या ऐसी संरचनाओं के निर्माण की अनुमति दी जानी चाहिए थी।
भाषा अमित प्रशांत
प्रशांत

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