दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने से तीन छात्रों की मौत, पांच की हालत नाजुक
दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने से तीन छात्रों की मौत, पांच की हालत नाजुक
नयी दिल्ली, छह सितंबर (भाषा) दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के दक्षिणी परिसर के पास सत्य निकेतन की एक संकरी गली में लड़कों के छात्रावास के रूप में इस्तेमाल हो रही 50 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत रविवार अपराह्न ढह गई। इस हादसे में तीन छात्रों की मौत हो गई जबकि कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
पुलिस ने बताया कि मलबे से अब तक आठ लोगों को निकाला गया है, जिनमें से दो को अस्पताल में मृत लाया हुआ घोषित कर दिया गया, जबकि एक अन्य ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। पांच व्यक्ति की हालत नाजुक है और बचावकार्य के दौरान घायल हुए एक बचावकर्मी को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि इमारत के मलबे के नीचे अब भी लगभग 40 से 50 लोग फंसे हो सकते हैं। इस इमारत में एक बेसमेंट और ऊपर पांच मंजिलें थीं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिस इमारत का बेसमेंट ‘पेइंग गेस्ट’ (पीजी) के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था, वहां मरम्मत का काम हो रहा था, तभी अपराह्न करीब 1:30 बजे इमारत ढह गई।
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि कुछ दिनों से बारिश होने के कारण बेसमेंट में पानी जमा होने लगा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, नींव भी बेहद कमजोर थी, जिसके कारण इमारत ढह गई।
दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की टीम दमकल वाहनों और ‘कैट’ एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंचीं और बचाव कार्य शुरू किया।
संकरी एवं भीड़भाड़ वाली गलियों वाले इस इलाके में कई छात्रावास और भोजनालय हैं।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह ढांचा करीब 50 वर्ष पुराना था।
बेहद पास-पास बनी इमारतों और बड़ी संख्या में छात्रों की मौजूदगी के कारण अक्सर आने-जाने के लिए बहुत कम जगह बचती है। स्थानीय लोगों ने कहा कि इलाके में रहने वाले अधिकतर छात्र केरलम, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से हैं और पास में स्थित कॉलेजों में पढ़ते हैं।
जब बचाव दल के सदस्य मलबे को हटाकर राहत एवं बचाव कार्य में जुटे थे, तो स्थानीय लोग और प्रत्यक्षदर्शी भी इस मुश्किल प्रयास में उनके साथ शामिल हो गए। उन्होंने अपने हाथों और उपलब्ध औजारों की मदद से मलबे में दबे लोगों की तलाश शुरू की।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक बेहोश युवक मलबे के नीचे फंसा हुआ दिख रहा है, जिसका आधा चेहरा और एक हाथ बाहर दिखाई दे रहा है, जबकि स्थानीय लोग उसे बाहर निकालने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के एक सूत्र ने बताया, ‘‘कुल छह लोगों को अस्पताल लाया गया है। इनमें से पांच की हालत गंभीर है और एक व्यक्ति को मृत अवस्था में लाया गया था। बचाव कार्य में शामिल एक व्यक्ति को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है।’’
घटना के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और सांसद बांसुरी स्वराज तुरंत मौके पर पहुंचे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस घटना में लोगों की मौत पर दुख जताया।
शाह ने कहा कि उन्होंने जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री, पुलिस आयुक्त और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के महानिदेशक से बात की।
उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘घायलों को हर जरूरी चिकित्सीय मदद दी जा रही है। सभी घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं।’’
एक अधिकारी ने बताया कि नयी दिल्ली रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त दक्षिण-पश्चिम जिले के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) और अतिरिक्त डीसीपी बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस इमारत का नाम ‘हॉस्टल डेज’ था और इसका मालिक गुरुग्राम का रहने वाला है।
अधिकारी ने बताया कि इमारत करीब 50 वर्ष पुरानी थी।
प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है और पुलिस की सात-आठ टीम इमारत के मालिक की तलाश कर रही हैं।
दिल्ली पुलिस के एक बयान में कहा गया, ‘‘अब तक मलबे में फंसे या घायल लोगों की सही संख्या का पता नहीं चल पाया है। पुष्टि होने पर आगे की जानकारी दी जाएगी।’’
स्थानीय निवासियों ने कहा कि यह छात्रावास हमेशा भरा रहता था और मलबे के नीचे अब भी 40 से 50 लोगों के फंसे होने की आशंका है।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, ‘‘यहां की गलियां बहुत संकरी हैं, इसलिए बचाव वाहनों के लिए घटनास्थल पर जल्दी पहुंचना मुश्किल था।’’
दिल्ली पुलिस में काम करने वाले स्थानीय निवासी राजन छेत्री ने बताया कि इमारत में लगभग 15 कमरे थे और हर कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे।
छेत्री ने कहा, ‘‘यहां रहने वाले ज्यादातर छात्र केरलम, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से हैं और मुख्य रूप से मोतीलाल नेहरू कॉलेज, आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज और श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में पढ़ते हैं। वे प्रति बिस्तर करीब 12,000 रुपये किराया दे रहे थे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं पिछले 20 वर्षों से यहां रह रहा हूं। बेसमेंट में कुछ निर्माण कार्य हो रहा था, जहां पानी जमा होने लगा था। नींव भी बेहद कमजोर थी।’’
एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि अगर यह घटना किसी कार्यदिवस पर हुई होती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी, क्योंकि आसपास के कई छात्र घर गए हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यहां बहुत कम लोग थे।’’
दिल्ली में शुक्रवार से लगातार बारिश हो रही है।
स्थानीय निवासियों ने घनी आबादी वाले इस इलाके में इमारतों की हालत और उनके रखरखाव को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में कई मकानों को पेइंग गेस्ट (पीजी) में बदल दिया गया है।
पिछले 20-22 वर्षों से इलाके में रह रहीं प्रियंका ने कहा, ‘‘यहां इमारतें पांच-छह मंजिल तक बनाई जा रही हैं। कई मकानों को लड़कों के पीजी (पेइंग गेस्ट) में तब्दील कर दिया गया है और मालिक कहीं और चले गए हैं। वे बस संपत्ति को पीजी का नाम दे देते हैं, किराया ऑनलाइन लेते हैं और इलाके में वापस आकर यह तक नहीं देखते कि स्थिति क्या है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जो इमारत ढही है, वह 20 साल से अधिक पुरानी है और इतने वर्षों में मैंने यहां कोई रखरखाव का काम होते नहीं देखा। पूरा सत्य निकेतन पीजी से भरा हुआ है। मुश्किल से 30 प्रतिशत मकान मालिक ही यहां रहते हैं।’’
प्रियंका ने कहा, ‘‘यहां नालियां और सीवर तक खुले हैं। इमारत के अंदर कई छात्र फंसे हुए थे। बारिश हो रही थी, इसलिए ज्यादातर छात्र अपने कमरों में थे, जबकि सप्ताहांत के कारण कुछ छात्र घर चले गए थे।’’
पुलिस स्थानीय लोगों और मौके पर मौजूद लोगों से घटनास्थल से दूर रहने की अपील कर रही है, क्योंकि भीड़ के कारण बचाव कार्य में बाधा आ रही है। एंबुलेंस की आवाजाही सुचारू रखने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक अनिल शर्मा घटनास्थल पर पहुंचे और बताया कि अब भी लोग मलबे में फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमें अंदर फंसे लोगों के फोन भी आ रहे हैं। टीम लगातार अंदर फंसे लोगों के संपर्क में है।’’
पुलिस ने स्थानीय लोगों और घटना को देखने आने वाले लोगों को घटनास्थल से दूर रहने की सलाह दी है, क्योंकि वहां लोगों की मौजूदगी से बचाव कार्यों में बाधा आ रही है।
एंबुलेंस की आवाजाही में कोई रुकावट नहीं आए, यह सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है।
भाषा सुरभि दिलीप
दिलीप

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