नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने ‘इंडियन पोलो एसोसिएशन’ की उस याचिका पर सुनवाई के लिए बुधवार को नौ जुलाई की तारीख तय की, जिसमें 15.20 एकड़ में फैले ‘जयपुर पोलो ग्राउंड’ से एसोसिएशन को बेदखल करने के केंद्र के 20 मई के आदेश पर रोक लगाने से इनकार करने के सत्र न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई है।
न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर ने इस बात पर गौर करने के बाद मामले की सुनवाई स्थगित कर दी कि सत्र न्यायालय के फैसले की प्रति पक्षकारों के पास अभी उपलब्ध नहीं है।
केंद्र के वकील ने ‘पोलो ग्राउंड’ की घास खोदे जाने को लेकर याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील की चिंता को दूर करते हुए आश्वासन दिया कि इस दौरान ऐसा कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
न्यायमूर्ति शंकर ने केंद्र के वकील से कहा, ‘‘वैसे भी कब्जा आपके पास है इसलिए अभी इसे उखाड़ने की कोई जल्दी नहीं है।’’
केंद्र सरकार के वकील आशीष दीक्षित ने कहा, ‘‘मैंने 29 जून को भी कहा था कि हम कुछ नहीं करेंगे।’’
दीक्षित ने 29 जून को अवकाशकालीन पीठ से कहा था कि ‘पोलो ग्राउंड’ में चाहरदीवारी बनाने के लिए निशान लगाए जा रहे हैं और खेल के लिए इस्तेमाल होने वाली घास वाली सतह पर कोई काम नहीं किया जा रहा।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कीर्तिमान सिंह ने बुधवार को दलील दी कि बेदखली आदेश के खिलाफ अपील पर सत्र न्यायालय 23 जुलाई को सुनवाई करेगा। उन्होंने अधिकारियों को तब तक ‘पोलो ग्राउंड’ को ‘‘नष्ट’’ नहीं करने का निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया।
उन्होंने कहा, ‘‘आज हमारा अनुरोध केवल इतना है कि मामले की सुनवाई होने तक वे कोई कदम न उठाएं और मैदान की घास वाली सतह को नुकसान न पहुंचाएं। संपत्ति पर उनका कब्जा है। मामले की सुनवाई होने तक मैदान को नष्ट न किया जाए क्योंकि इससे अपूरणीय क्षति होगी।’’
उच्च न्यायालय द्वारा मामले को नौ जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने के बाद सिंह ने केंद्र सरकार के वकील से याचिकाकर्ता को पोलो ग्राउंड का निरीक्षण करने की अनुमति देने का भी अनुरोध किया।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम कोई आदेश पारित नहीं कर रहे हैं। आप उनसे अनुरोध करें।’’
‘इंडियन पोलो एसोसिएशन’ ने अपनी याचिका में सत्र अदालत के 18 जून के आदेश को चुनौती दी है। यह सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम के तहत अपीलीय प्राधिकरण के रूप में कार्य करता है। अदालत ने एसोसिएशन की उस अंतरिम याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें जयपुर पोलो ग्राउंड का कब्जा वापस पाने, मई 20 के बेदखली आदेश को लागू करने पर रोक लगाने और मैदान को खोदने, उसमें छेड़छाड़ करने या बदलाव करने से रोकने का अनुरोध किया गया था।
भाषा सिम्मी वैभव
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