(तस्वीर के साथ)
तिरुवनंतपुरम, एक जुलाई (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने बुधवार को कहा कि विड़िण्गम बंदरगाह के बाहर उससे जुड़ी अवसंरचना और उद्योगों का विकास उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
सतीशन ने आरोप लगाया कि राज्य में पूर्ववर्ती वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार के कार्यकाल में संबद्ध अवसंरचना और उद्योगों के विकास में धीमी प्रगति के कारण पड़ोसी तमिलनाडु इस बंदरगाह का सबसे बड़ा लाभार्थी बन सकता है।
सतीशन ने विधानसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि बंदरगाह से असल आर्थिक लाभ उसके बाहर होने वाली गतिविधियों से मिलेगा जिनसे राज्य का राजस्व और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह बढ़ेगा तथा रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सड़क और रेल संपर्क बेहद महत्वपूर्ण हैं लेकिन पिछली एलडीएफ सरकार के कार्यकाल में दोनों में से किसी भी दिशा में उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई।
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर बंदरगाह आधारित उद्योगों के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में धीमी गति से आगे बढ़ने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम संबद्ध उद्योगों के लिए भूमि अधिग्रहण करने में विफल रहते हैं तो पड़ोसी तमिलनाडु विड़िण्गम बंदरगाह का सबसे बड़ा लाभार्थी बनने के लिए तेजी से तैयारी कर रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘तमिलनाडु ने पिछले पांच वर्ष में विड़िण्गम बंदरगाह का लाभार्थी बनने के लिए काफी प्रयास किए हैं। बंदरगाह से जुड़े उद्योगों के लिए भूमि अधिग्रहण और अन्य सहायक अवसंरचना के विकास की गति केरल सरकार की ओर से दुर्भाग्य से बहुत धीमी रही।’’
सतीशन ने राज्य के बजट में घोषित सरकार की नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि बंदरगाह के बाहर उससे जुड़ी अवसंरचना और गतिविधियों का व्यापक विकास करके ही केरल को एक प्रमुख रसद एवं औद्योगिक केंद्र बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘अन्यथा विड़िण्गम केवल एक प्रवेश-द्वार बंदरगाह बनकर रह जाएगा।’’
सतीशन ने कहा कि एक महीने पहले सत्ता संभालने के बाद सरकार ने परियोजना का विस्तृत अध्ययन किया है और उद्योग विभाग के अधीन संस्थानों को कंटेनर स्टेशन स्थापित करने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया है।
उन्होंने बताया कि विभाग ने इस उद्देश्य के लिए भूमि उपलब्ध कराने पर भी सहमति जताई है।
सतीशन ने कहा कि राज्य ने 2016 से 2026 के बीच विड़िण्गम बंदरगाह परियोजना पर 3,085.52 करोड़ रुपये खर्च किए।
उन्होंने बताया कि रियायत समझौते के तहत बंदरगाह के निर्माण के लिए अदाणी पोर्ट्स को दिए जाने वाले 1,635 करोड़ रुपये के अनुदान में से केंद्र ने 817.80 करोड़ रुपये ‘व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण’ (वीजीएफ) के रूप में मंजूर किए हैं।
उन्होंने कहा कि त्रिपक्षीय प्रीमियम-साझेदारी समझौते के तहत वीजीएफ की पूरी राशि मिल चुकी है लेकिन राज्य ने यह राशि केंद्र को वापस नहीं की है, क्योंकि विभिन्न सरकारों का लगातार रुख रहा है कि यह अनुदान है और इसका खर्च केंद्र सरकार को वहन करना चाहिए।
सतीशन ने कहा, ‘‘पिछली सरकार ने केंद्र से इस राशि को माफ करने का अनुरोध किया था। हमारी सरकार का भी यही रुख है और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।’’
उन्होंने कहा कि विड़िण्गम बंदरगाह परियोजना का दूसरा चरण 2028 में पूरा होना निर्धारित है और सरकार इसे समय पर पूरा करने के लिए हर आवश्यक सहयोग देगी।
भाषा सिम्मी रंजन
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