जयपुर के कर सलाहकार ने एसयूवी को बनाया एम्बुलेंस, दो दशकों में कई लोगों की बचाई जान

जयपुर के कर सलाहकार ने एसयूवी को बनाया एम्बुलेंस, दो दशकों में कई लोगों की बचाई जान

जयपुर के कर सलाहकार ने एसयूवी को बनाया एम्बुलेंस, दो दशकों में कई लोगों की बचाई जान
Modified Date: May 3, 2026 / 04:39 pm IST
Published Date: May 3, 2026 4:39 pm IST

जयपुर, तीन अप्रैल (भाषा) जयपुर के एक कर सलाहकार पिछले दो दशकों से अधिक समय से अपनी एसयूवी का उपयोग एक अस्थायी एम्बुलेंस के रूप में कर रहे हैं। इसके जरिए वह दुर्घटना पीड़ितों को समय पर अस्पताल पहुँचाने में मदद करते हैं और अब तक कई लोगों की जान बचा चुके हैं।

जयपुर के मालवीय नगर निवासी संदीप गुप्ता ने अब तक 120 से अधिक घायलों को अस्पताल पहुंचाया है। इनमें से 35 लोग तो ऐसे थे, जिन्हें यदि समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जाता, तो उनकी मौत हो सकती थी।

इस कार्य को करने की उन्हें कैसे प्रेरणा मिली इसे याद करते हुए गुप्ता ने ‘पीटीआई—भाषा’ को बताया, ‘‘22 साल पहले विधानसभा के पास परिवहन विभाग के सामने कोई व्यक्ति सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था। लोग एंबुलेंस का इंतजार कर रहे थे। काफी इंतजार के बाद एम्बुलेंस तो पहुंच गई, लेकिन घायल व्यक्ति की मौत गई।’’

उन्होंने कहा, ”इस घटना ने मुझे गहराई से प्रभावित किया और संकल्प लिया कि भविष्य में किसी भी घायल को एम्बुलेंस का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। तभी से अपनी कार को जरूरत पड़ने पर एम्बुलेंस में बदलना शुरू कर दिया। अब जहां भी मुझे दुर्घटना में कोई घायल मिलता है, तो अपनी कार से उसे अस्पताल पहुंचाता हूं।”

गुप्ता ने बताया कि शहर में कहीं से भी गुजरते समय सड़क दुर्घटना नजर आने पर सबसे पहले वह मौके पर रुकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके बाद एम्बुलेंस का इंतजार किए बिना वह घायल को कार से अस्पताल पहुंचाते हैं। उन्होंने बताया कि वह अपनी कार में प्राथमिक उपचार का सामान, चादर और अन्य जरूरी सामग्री भी रखते हैं।

उन्होंने बताया कि उनके इस मिशन में यातायात पुलिस का हमेशा सहयोग मिला है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में पुलिस उपायुक्त यातायात की ओर से विशेष अनुमति के लिए पत्र दिया गया था।

कई लोगों ने अपनी जान बचाने का श्रेय गुप्ता को दिया है।

रामनगरिया निवासी मृदुल गौतम ने बताया, ‘‘17 नवंबर 2017 की वह शाम मेरी जिंदगी की सबसे मुश्किल शामों में से एक थी। मैं अपने छोटे भाई दैविक के साथ स्कूल से स्कूटी पर घर लौट रहा था, तभी एक भयावह दुर्घटना हो गई। मैं गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश हो गया और मेरा छोटा भाई भी चोटिल हो गया। उस समय स्थिति बहुत चिंताजनक थी।’’

मृदुल ने बताया, ‘‘ठीक उसी समय रास्ते से गुजर रहे संदीप अंकल ने हमें तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने भी कहा कि उनकी समय पर सहायता और तेज निर्णय के कारण ही हमारी जान बच सकी। संदीप अंकल ने मुझे नया जीवन दिया। ऐसी दुर्घटना के बाद जीवन दान पाकर मैं बेंगलूरु में एक प्रोजेक्ट एसोसिएट के पद पर कार्यरत हूं।

सीताबाड़ी निवासी योगिता शर्मा ने बताया कि जवाहर लाल नेहरू मार्ग पर कॉमर्स कॉलेज के पास 23 अक्टूबर 2009 की शाम वह स्कूटी से घर लौट रही थीं। शर्मा ने बताया कि तभी एक गंभीर दुर्घटना के बाद जब वह सड़क किनारे एक गड्ढे में घायल अवस्था में पड़ी थीं, तब गुप्ता ने ही उन्हें बचाया और अस्पताल पहुँचाया था।

गुप्ता के इस सामाजिक सरोकार को देखते हुए उन्हें पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, राज्य के पुलिस महानिदेशक और कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने कहा, “किसी की जान बचाना सबसे बड़ा धर्म है।”

भाषा बाकोलिया नेत्रपाल दिलीप

दिलीप


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