जम्मू कश्मीर विधानसभा में स्कूलों के उन्नयन को लेकर मंत्री एवं पीडीपी विधायक के बीच बहस

जम्मू कश्मीर विधानसभा में स्कूलों के उन्नयन को लेकर मंत्री एवं पीडीपी विधायक के बीच बहस

जम्मू कश्मीर विधानसभा में स्कूलों के उन्नयन को लेकर मंत्री एवं पीडीपी विधायक के बीच बहस
Modified Date: April 4, 2026 / 06:39 pm IST
Published Date: April 4, 2026 6:39 pm IST

जम्मू, चार अप्रैल (भाषा) जम्मू कश्मीर विधानसभा में शनिवार को मंत्री सकीना इटू और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) विधायक वहीद उर रहमान पारा के बीच स्कूलों के उन्नयन से संबंधित एक प्रश्न को लेकर तीखी बहस हुई और सरकार ने पूर्व में विपक्ष की सरकार को इसके लिए दोषी ठहराया।

इटू ने राज्य का दर्जा घटाकर केंद्र शासित प्रदेश किए जाने और अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के लिए भी पीडीपी को जिम्मेदार ठहराया।

जम्मू कश्मीर में 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा ने एक प्रेस वार्ता में टिप्पणी की थी कि हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी की हत्या के बाद भड़के हिंसक प्रदर्शनों में गोलियों से घायल हुए लोग सेना शिविर से ‘‘दूध या टॉफियां’’ लेने नहीं गए थे।

इस टिप्पणी को हिंसा के दौरान हुई मौतों को सही ठहराने के रूप में देखा गया।

इटू ने पीडीपी नेता रफीक अहमद नाइक द्वारा स्कूलों के उन्नयन के संबंध में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कई बार इस टिप्पणी का जिक्र किया।

उन्होंने पारा से ‘कोल्ड स्टोर’ के बारे में भी सवाल किया और कहा, ‘‘हम जानते हैं कि आपको कौन नियंत्रित कर रहा है तथा आपको पाठ्यक्रम कहां से मिल रहा है।’’

पारा ने सदन में हंगामेदार माहौल के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) सरकार पर पलटवार किया पर सदन में मच रहे हंगामे में उनकी बात पूरी तरह से नहीं सुनी जा सकी। उन्हें मंत्री पर कटाक्ष करते हुए सुना गया कि एमबीबीएस कोर्स पूरा करने में असफल रहने के बावजूद वह शिक्षा मंत्रालय संभाल रही हैं।

मंत्री ने कहा, ‘‘यहां मुख्य मुद्दा उन्नयन मंजूरी देने से संबंधित है। यह सबकी चिंता है; मेरी भी। मैं भी चाहती हूं कि स्कूलों का उन्नयन हो और नए स्कूलों को मंजूरी मिले। हालांकि, मैं उन्हें एक बात याद दिलाना चाहूंगी: 2014 से पहले, उमर अब्दुल्ला के तत्कालीन मंत्रिमंडल के नेतृत्व में लगभग 842 उन्नयन कार्य किए गए थे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन 2014 के बाद जब सरकार बदली और बाद में जब पीडीपी-भाजपा सरकार सत्ता में आई, तो उन सभी प्रस्तावों को रोक दिया गया। बयान देना, एक-दूसरे को निशाना बनाना और जनता के लिए तमाशा करना आसान है, लेकिन वास्तविकता अलग है।’’

मंत्री ने पारा द्वारा हाल में सदन में दस्तावेज फाड़ने और फेंकने की घटना का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘हम दिखावे में विश्वास नहीं करते…हम व्यावहारिक कार्य करने में विश्वास करते हैं।’’

भाषा यासिर माधव

माधव


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