जम्मू, 27 जुलाई (भाषा) उधमपुर जिले में सोमवार को भूस्खलन के कारण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध हो गया जबकि डोडा जिले में एक पुल में दरार जैसे निशान की सूचना के बाद उसे सुरक्षा निरीक्षण के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
यातायात विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सोमवार तड़के उधमपुर जिले के देवल में हुए भूस्खलन के कारण उसका सारा मलबा जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर आ गया जिससे दोनों दिशाओं में वाहनों की आवाजाही को रोकना पड़ा।
उन्होंने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने मलबे को हटाने और जल्द से जल्द यातायात बहाल करने के लिए काम शुरू कर दिया है।
प्रवक्ता ने कहा, ‘‘यात्रियों को सलाह दी जाती है कि जब तक राजमार्ग को सुरक्षित घोषित नहीं कर दिया जाता और यातायात के लिए नहीं खोल दिया जाता, तब तक वे इस पर यात्रा करने से बचें। यहां भूस्खलन और पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है। लोगों से यह भी आग्रह किया जाता है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सड़क के संबंध में वास्तविक जानकारी के लिए केवल यातायात पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल द्वारा जारी जानकारी पर ही भरोसा करें।’’
हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि कड़ी सुरक्षा के बीच अमरनाथ श्रद्धालुओं के नए जत्थे को बालटाल आधार शिविर के लिए राजमार्ग पर एक तरफ से यातायात बहाल करने के बाद प्रभावित हिस्से को पार करने की अनुमति दी गई।
अधिकारियों ने बताया कि अगले कुछ घंटों के भीतर दूसरी लेन चालू होने के बाद यातायात सामान्य हो जाएगा।
वहीं, अधिकारियों ने पुल डोडा में दरारें देखे जाने की सूचना के बाद रविवार देर रात उसे सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण बंद कर दिया।
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिशासी अभियंता अनिल मेहरा ने कहा कि इंजीनियरों द्वारा किए गए निरीक्षण में पाया गया कि ये निशान संरचनात्मक दरारें नहीं हैं, बल्कि निर्माण के दौरान शटरिंग जोड़ों पर कंक्रीट के एक-दूसरे पर आने के कारण बने हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘(हाल ही में हुई भारी बारिश के बाद) ऐसी आशंकाएं थीं कि पुल में दरारें आ गई हैं। एहतियातन और सुरक्षा की दृष्टि से, हमने रात के दौरान इसे वाहनों के आवागमन के लिए बंद कर दिया था। आज (सोमवार) सुबह विस्तृत निरीक्षण के बाद, हमारे प्रारंभिक आकलन से संकेत मिलता है कि ये संरचनात्मक दरारें नहीं हैं।’’
उन्होंने बताया कि डिजाइन निरीक्षण एवं गुणवत्ता नियंत्रण से विशेषज्ञों की एक टीम को भी पुल का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करने और गुणवत्ता जांच करने के लिए बुलाया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इसमें कोई संरचनात्मक दोष तो नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘एक बार जब पुल को सुरक्षित प्रमाणित कर दिया जाएगा तो इसे वाहनों के आवागमन के लिए फिर से खोल दिया जाएगा।’’
भाषा खारी नरेश
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