पांच भाषाओं में छह हजार गीतों की विरासत छोड़ गईं जमुना रानी
पांच भाषाओं में छह हजार गीतों की विरासत छोड़ गईं जमुना रानी
चेन्नई, दो अगस्त (भाषा) दक्षिण भारतीय सिनेमा में पुरानी परिपाटी को तोड़ते हुए जमुना रानी उर्फ ‘जिक्की ने बुलंद, चुलबुली और जीवंत आवाज से उन गीतों को नई पहचान दी, जिन्हें उस समय पारंपरिक नायिकाओं की आवाज नहीं माना जाता था। उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा के दम पर हर तरह के गीतों में अपनी अमिट छाप छोड़ी।
जमुना रानी ने अपने दशकों के करियर में पांच भाषाओं में छह हजार से अधिक गीतों को अपनी आवाज दी। उन्होंने शास्त्रीय भक्ति गीतों से लेकर अपने दौर के चर्चित‘क्लब डांस गीतों’ तक हर शैली के गीत गाए।
जमुना का 30 जुलाई को बेंगलुरु में 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
जमुना रानी ने बाल कलाकार के रूप में पार्श्वगायन की दुनिया में कदम रखा था। उन्होंने महज सात वर्ष की उम्र में 1946 की तेलुगु फिल्म ‘त्यागय्या’ से अपने करियर की शुरुआत की। किशोरावस्था में पहुंचते-पहुंचते वह मुख्य कलाकारों के लिए पार्श्वगायन करने लगी थीं। हालांकि, 1950 और 1960 के दशक में अपने अलग अवाज की वजह से पहचान बनी।
उस दौर में जब नायिका की आवाज को मुलायम और नाजुक माना जाता था, जमुना रानी ने एक अलग विकल्प पेश किया। उनकी आवाज में आत्मविश्वास था, जिसने उन्हें पश्चिमी शैली, नाटकीय अंदाज या तेज लय वाले गीतों के लिए सबसे उपयुक्त गायिका बना दिया।
तमिल और तेलुगु सिनेमा में आधुनिकता का नया एहसास पैदा करने वाले उनके जोशीले गीत आज भी उनकी शैली की सबसे बड़ी पहचान माने जाते हैं।
जब संगीतकारों ने जैज, कैबरे या पश्चिमी पॉप संगीत के प्रभाव वाले गीत तैयार किए, तो उनकी पहली पसंद जमुना रानी होती थीं। 1955 की फिल्म ‘गुलेबकावली’ का गीत ‘आसैयुम एन नेसमुम’ सुपरहिट हुआ और इससे यह स्थापित हुआ कि वह जटिल लय वाले गीतों को भी बेहद सहजता से गा सकती हैं।
जमुना रानी की शैली किसी एक भाषा या शैली तक सीमित नहीं रही। दक्षिण भारतीय फिल्मों में तेज लय वाले गीतों की प्रमुख आवाज होने के साथ-साथ उन्होंने अन्य भाषाओं में भी बेहद भावपूर्ण और मधुर गीत गाए।
भाषा
राखी धीरज
धीरज

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