जीबीआईटी परियोजना के विरोध में जद (एस) की पदयात्रा, भूमि अधिग्रहण का किसानों ने विरोध किया
जीबीआईटी परियोजना के विरोध में जद (एस) की पदयात्रा, भूमि अधिग्रहण का किसानों ने विरोध किया
बेंगलुरु, 21 जून (भाषा) जनता दल (सेक्युलर) ने रविवार को बिदादी के निकट प्रस्तावित ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (जीबीआईटी) परियोजना और इसके लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण के विरोध में पदयात्रा निकाली। इस परियोजना का क्षेत्र के कुछ किसानों और ग्रामीणों द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है।
‘‘नम्मा भूमि, नम्मा हक्कु’’ (हमारी जमीन, हमारा अधिकार) के नारे के साथ निकाली गई इस पदयात्रा का नेतृत्व जद (एस) के युवा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी ने किया। यह यात्रा अंचीपुरा गांव से शुरू होकर आठ गांवों से गुजरते हुए होसूर तक जाएगी।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, पदयात्रा में बड़ी संख्या में किसान, ग्रामीण, जद (एस) के नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। यह यात्रा अंचीपुरा कॉलोनी, बन्निगिरि, मारेवेगौदानादोड्डी, गुंडुतोपु, गोल्लाहल्ली, कोडिपाल्या होते हुए होसूर पहुंचेगी।
किसानों और ग्रामीणों के एक वर्ग के विरोध के बावजूद हाल ही में रामनगर और हारोहल्ली तालुकों के तीन गांवों में 499 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए अंतिम अधिसूचना जारी की गई है। यह मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है, जिसे भारत की ‘‘पहली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) संचालित एकीकृत टाउनशिप’’ के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, यह परियोजना क्षेत्र के नौ गांवों में कुल 7,481 एकड़ भूमि में विकसित की जानी प्रस्तावित है।
उन्होंने बताया कि हाल में जारी अधिसूचना आगामी दिनों में जारी होने वाली भूमि अधिग्रहण संबंधी अधिसूचनाओं की शृंखला की पहली कड़ी हो सकती है।
खबरों के अनुसार, ग्रेटर बेंगलुरु विकास प्राधिकरण ने प्रस्तावित टाउनशिप के लिए मास्टर प्लान, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने और परियोजना प्रबंधन सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु सलाहकार नियुक्त करने के लिए 26 करोड़ रुपये का निविदा आमंत्रण जारी किया है।
निखिल कुमारस्वामी ने 11 किलोमीटर लंबी पदयात्रा शुरू होने से पहले सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक गणना से प्रेरित नहीं, बल्कि किसानों की आजीविका की रक्षा करने की जिम्मेदारी से प्रेरित है।
उन्होंने कहा, ‘‘जद (एस) का किसानों के प्रति समर्थन केवल भाषणों तक सीमित नहीं है। इसका मतलब है कि उनके साथ जमीन पर मजबूती से खड़ा रहना। एक दिन की पदयात्रा से कुछ हासिल नहीं होगा, यह तो सिर्फ शुरुआत है।’’
जद (एस) नेता ने दावा किया कि 95 प्रतिशत किसान अपनी जमीन परियोजना के लिए देने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि न तो अधिकारियों और न ही क्षेत्र के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने किसानों से मिलकर उनकी राय जानी है और न ही भूमि अधिग्रहण की स्थिति में उनकी आजीविका को लेकर कोई आश्वासन दिया है।
कुमारस्वामी ने कहा कि किसानों और ग्रामीणों के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश की जा रही है और उनसे अपील की कि वे प्रस्तावित परियोजना के लिए जमीन न देने के अपने संकल्प पर एकजुट रहें।
लगातार विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार ने उन किसानों को मुआवजा देना शुरू कर दिया है, जिन्होंने परियोजना के लिए अपनी जमीन देने पर सहमति जताई है।
सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार शाम केम्पैयाहनापाल्या गांव के सात किसानों को मुआवजे के पहले चेक सौंपे गए।
सरकार ने जमीन का मूल्य 2.30 करोड़ रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया है। सूत्रों के अनुसार, मुआवजा पैकेज में भूमि पर उगाई जाने वाली फसलों के आधार पर अतिरिक्त भुगतान का भी प्रावधान है।
मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी स्थानीय किसानों के विरोध के बीच ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप परियोजना और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया का विरोध किया है।
भाषा रवि कांत नेत्रपाल
नेत्रपाल

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