झारखंड से बाहर विस्तार की रणनीति के तहत झारखंड मुक्ति मोर्चा असम में लड़ेगा चुनाव

झारखंड से बाहर विस्तार की रणनीति के तहत झारखंड मुक्ति मोर्चा असम में लड़ेगा चुनाव

झारखंड से बाहर विस्तार की रणनीति के तहत झारखंड मुक्ति मोर्चा असम में लड़ेगा चुनाव
Modified Date: March 19, 2026 / 03:46 pm IST
Published Date: March 19, 2026 3:46 pm IST

(नमिता तिवारी)

रांची, 19 मार्च (भाषा) क्षेत्रीय पार्टी की अपनी छवि से बाहर निकलकर राष्ट्रीय पार्टी के रूप में उभरने को उत्सुक झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) असम विधानसभा चुनाव में 126 में से 30 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है। पार्टी के एक पदाधिकारी ने यह जानकारी दी है।

पार्टी का लक्ष्य असम के चाय बागानों में रहने वाली लगभग 70 लाख की आदिवासी आबादी को अपनी ओर आकृष्ट करना है। इन आदिवासियों में से कई लोगों के पूर्वज बहुत पहले झारखंड से पलायन करके वहां जा बसे थे।

झामुमो के एक नेता ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘विस्तृत विचार-विमर्श के बाद पार्टी ने असम में आगामी विधानसभा चुनावों में 31 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। हालांकि, इस बारे में अंतिम निर्णय जल्द ही लिया जाएगा।’’

नाम न छापने की शर्त पर एक नेता ने कहा कि असम की बड़ी जनजातीय आबादी पार्टी के विस्तार के लिए अच्छा अवसर प्रदान करती है, क्योंकि इनमें चाय बागानों के कई ऐसे मजदूर शामिल हैं जिनकी जड़ें झारखंड के छोटानागपुर क्षेत्र से जुड़ी हैं।

उन्होंने कहा कि झामुमो का मानना है कि इन समुदायों की सामाजिक और आर्थिक समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है और वे मजबूत राजनीतिक प्रतिनिधित्व की तलाश में हैं।

झामुमो के महासचिव विनोद पांडेय ने कहा, ‘‘हेमंत सोरेन देशव्यापी आदिवासी अधिकारों की लड़ाई में एक लोकप्रिय नेता के रूप में उभरे हैं। उन्होंने पलायन के बाद असम जा बसे आदिवासी समुदाय का भरोसा जीता है और अब वह चाय बागानों में काम करने वाली जनजातियों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। असम के स्थानीय आदिवासी भी उन्हें एक सशक्त व्यक्तित्व मानते हैं, जो उनके हितों की रक्षा कर अन्याय के खिलाफ लड़ सकते हैं।’’

पार्टी के एक अन्य नेता ने बताया कि 2024 में झारखंड विधानसभा चुनाव में झामुमो की जीत के बाद से सोरेन असम का दौरा कर रहे हैं और इस पूर्वोत्तर राज्य में आदिवासी मुद्दों को उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री एक-दो दिन में वहां जा सकते हैं।

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के समापन दिवस पर सोरेन ने बुधवार को दावा किया कि देशभर के वंचित समुदाय अपनी समस्याओं को उठाने के लिए झारखंड की ओर देख रहे हैं।

सोरेन ने कहा, ‘‘हम निश्चित रूप से उन आदिवासियों की आवाज बनेंगे जो अन्यत्र अत्याचारों का सामना कर रहे हैं, चाहे वह असम हो, मणिपुर हो या देश का कोई भी कोना।’’

झारखंड सरकार ने नवंबर 2024 में असम के चाय बागानों में काम करने वाली ‘‘वंचित’’ जनजातियों की दुर्दशा का अध्ययन करने के लिए एक पैनल के गठन को मंजूरी दी थी।

हेमंत सोरेन सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में लिया गया यह निर्णय, झारखंड विधानसभा चुनाव में झामुमो के नेतृत्व वाले गठबंधन और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के बीच चुनावी संघर्ष की पृष्ठभूमि में आया। उस चुनाव में असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बांग्लादेश से बड़े पैमाने पर घुसपैठ के आरोप में झारखंड के आदिवासी समुदाय की ‘‘मुश्किल’’ स्थिति का मुद्दा बार-बार उठाया था।

सोरेन ने पहले भी असम स्थित चाय बागान जनजातियों का मुद्दा उठाया था और इस पैनल का गठन हिमंत विश्व शर्मा के गढ़ पर हमले के रूप में देखा जा रहा था।

झारखंड में झामुमो के नेतृत्व वाले गठबंधन ने लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल की और 81-सदस्यीय विधानसभा में 56 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को केवल 24 सीटें ही मिल पाईं।

पार्टी असम के आदिवासी समुदाय का समर्थन हासिल करने के लिए सोरेन और उनकी विधायक पत्नी कल्पना सोरेन पर काफी भरोसा कर रही है, जो आदिवासी समुदाय की एक लोकप्रिय आवाज बनकर उभरी हैं। पार्टी ने यह भी संकेत दिया है कि वह असम में गठबंधन बनाने के लिए तैयार है।

सोरेन ने असम में दो विपक्षी दलों के नेताओं से मुलाकात की, जिसे पूर्वोत्तर राज्य के जटिल राजनीतिक परिदृश्य में गठबंधन के जरिये प्रवेश करने के व्यापक प्रयास के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

इस बीच, पार्टी ने असम चुनावों के लिए हेमंत सोरेन, उनकी पत्नी और झारखंड के कई कैबिनेट मंत्रियों सहित 20 प्रमुख प्रचारकों की सूची की घोषणा की है।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि झामुमो का लक्ष्य असम में एक मजबूत राजनीतिक आधार बनाना है, साथ ही आदिवासियों के विकास, सम्मान और अधिकारों पर केंद्रित विचारधारा को बढ़ावा देना है।

सोरेन ने आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति पर पिछले सप्ताह असम कांग्रेस प्रमुख गौरव गोगोई से चर्चा की।

इससे पहले, झामुमो प्रमुख ने मुख्यमंत्री शर्मा को एक पत्र लिखकर असम के चाय बागानों में रहने वाली लगभग 70 लाख की आदिवासी आबादी की दुर्दशा पर गहरी चिंता व्यक्त की थी और उनके लिए अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग की थी।

भाषा सुरेश नरेश

नरेश


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