मानव-पशु संघर्ष को कम के लिए 10 वर्षीय योजना पर काम कर रहा झारखंड: अधिकारी

मानव-पशु संघर्ष को कम के लिए 10 वर्षीय योजना पर काम कर रहा झारखंड: अधिकारी

मानव-पशु संघर्ष को कम के लिए 10 वर्षीय योजना पर काम कर रहा झारखंड: अधिकारी
Modified Date: January 11, 2026 / 03:43 pm IST
Published Date: January 11, 2026 3:43 pm IST

(संजय कुमार डे)

रांची, 11 जनवरी (भाषा) झारखंड सरकार हाथियों के हमलों की बढ़ती घटनाओं और गत एक सप्ताह में ऐसे मामलों में 25 लोगों की मौत के बीच मानव-पशु संघर्ष को कम करने और वनों को पुनर्स्थापित करने के लिए 10 वर्षीय दूरदर्शी योजना तैयार कर रही है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि 30 सूत्री एजेंडा से संबंधित इस व्यापक योजना का उद्देश्य इस तरह की समस्या का समाधान करना, वन्यजीव आवासों में सुधार करना, क्षरित हो चुके वनों को पुनर्स्थापित करना और स्थानीय समुदायों के लिए वन-आधारित आजीविका को बढ़ावा देना है।

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अधिकारियों ने बताया कि इस दूरदर्शी योजना का उद्देश्य बड़े पैमाने पर वनरोपण के माध्यम से खनन संबंधी प्रदूषण को कम करना और बेहतर प्रबंधन तथा संरक्षण के लिए वन सीमाओं का डिजिटलीकरण करना भी है।

झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) संजीव कुमार ने कहा कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ तो दृष्टिकोण पत्र को 31 मार्च तक अंतिम रूप दे दिया जाएगा और इसे अगले वित्तीय वर्ष से लागू किया जाएगा।

पीसीसीएफ ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘राज्य में मानव-पशु विशेषकर हाथियों के साथ बढ़ते संघर्षों को लेकर हम चिंतित हैं। इन मुद्दों के समाधान के लिए, हम एक 10-वर्षीय दूरदर्शी योजना तैयार कर रहे हैं, जिसे 31 मार्च तक अंतिम रूप दे दिया जाएगा और आगामी वित्तीय वर्ष में लागू किया जाएगा।’’

उन्होंने कहा कि दृष्टिपत्र का उद्देश्य पारिस्थितिकी संरक्षण और सामुदायिक कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करना है, जिससे मनुष्यों और वन्यजीवों के बीच अधिक सामंजस्यपूर्ण सहअस्तित्व की उम्मीद जगती है।

अधिकारी ने कहा, ‘‘दस वर्षीय दृष्टिपत्र में 30 मुद्दे शामिल हैं, जैसे कि वनों को पुनर्स्थापित करना, स्थानीय समुदायों के लिए वन-आधारित आजीविका का सृजन, वन सीमाओं का संरक्षण और डिजिटलीकरण, राज्य में बाघ, तेंदुआ और भालू जैसे जानवरों के आवासों में सुधार, खनन से प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्वास ताकि प्रदूषण के प्रभाव को कम किया जा सके और स्थानीय जलवायु में सुधार के लिए एक सूक्ष्म योजना तैयार करना।’’

यह दृष्टिकोण पत्र ऐसे समय में तैयार किया जा रहा है जब झारखंड में मानव-पशु संघर्षों के कारण जानमाल की हानि की खबरें लगातार आ रही हैं।

इस साल एक जनवरी से लेकर अब तक राज्य में हाथियों के हमलों में कम से कम 25 लोगों की मौत हो चुकी है।

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में एक ‘हिंसक’ हाथी ने 20 लोगों की जान ले ली।

उन्होंने बताया कि विभाग ने चाईबासा में उपद्रव मचाने वाले ‘शरारती’ हाथियों के लिए एक बचाव केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है।

अधिकारी ने कहा, ‘‘इसके लिए हमें 5-10 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। हम रांची में केंद्र स्थापित करने की योजना बना रहे हैं और जमीन की तलाश शुरू कर दी गई है।’’

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में मानव-हाथी संघर्ष के कारण 2019-20 वित्तीय वर्ष से लेकर पांच वर्षों की अवधि में 474 लोगों की जान जा चुकी है।

राज्य वन्यजीव बोर्ड के पूर्व सदस्य डी एस श्रीवास्तव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘खनन, विकास और अन्य दबावों के कारण वृहद वन क्षेत्र को हुए नुकसान से हाथियों और अन्य जानवरों को मानव बस्तियों में आने को मजबूर होना पड़ा है। उनके आवागमन के गलियारों पर या तो अतिक्रमण हो गया है या वे नष्ट हो गए हैं। जंगलों की अंधाधुंध कटाई के कारण हाथियों को भोजन, विशेष रूप से बांस की कमी का सामना करना पड़ रहा है। जंगलों के अंधाधुंध विनाश के कारण हाथियों को भोजन की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है, खासकर बांस की कमी का।’’

उन्होंने कहा कि राज्य में हाथियों की आबादी में भारी गिरावट के बावजूद, मानव-हाथी संघर्ष बढ़ रहा है।

भाषा धीरज वैभव

वैभव


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