हिंद महासागर क्षेत्र में संयुक्त समुद्री तंत्र सर्वसम्मति पर आधारित होगा: नौसेना प्रमुख
हिंद महासागर क्षेत्र में संयुक्त समुद्री तंत्र सर्वसम्मति पर आधारित होगा: नौसेना प्रमुख
पणजी, 21 फरवरी (भाषा) नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने शनिवार को कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में प्रस्तावित कोई भी संयुक्त समुद्री तंत्र भागीदार देशों के बीच आम सहमति पर आधारित होगा।
एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने इसके साथ ही क्षमता निर्माण प्रयासों में भागीदार देशों के लिए भारत के समर्थन का आश्वासन दिया।
एडमिरल त्रिपाठी ने गोवा समुद्री सम्मेलन (जीएमसी) 2026 के दौरान एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सम्मेलन के पहले सत्र में हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के संबंध में चर्चा हुई, जिसमें संयुक्त कार्य बल जैसी व्यवस्था की संभावना भी शामिल है।
उन्होंने कहा, “जीएमसी आम सहमति पर आधारित है। सभी देशों के बीच आम सहमति होनी चाहिए। सभी देशों के बीच सहमति होना जरूरी है। हम सबकी क्षमताएं अलग-अलग हैं, इसलिए हर देश जो योगदान दे सकता है, उसे ध्यान में रखना होगा।’’
नौसेना प्रमुख ने कहा कि नजदीकी परिचालन सहयोग का विचार सर्वमान्य है और संयुक्त कार्य बल के तौर तरीके पर सामूहिक रूप से काम करना होगा।
उन्होंने एक पिछली पहल का उल्लेख करते हुए इंडियन ओशन शिप (आईओएस) एसएजीएआर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) का उल्लेख किया, जिसके तहत पिछले साल हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) के 10 देशों के कर्मी एक भारतीय नौसैना के प्लेटफार्म पर सवार हुए और 41 दिनों तक एकसाथ सफर करते हुए पूरे क्षेत्र के बंदरगाहों का दौरा किया।
उन्होंने कहा, ‘‘विभिन्न देशों के समुद्री और राजनीतिक नेतृत्व सहित हमें जो अनुभव और प्रतिक्रिया मिली, वह बहुत सकारात्मक थी। इसी के आधार पर हमने इस वर्ष आईओएस एसएजीएआर 2.0 आयोजित करने का निर्णय लिया है। हम तिथि तय कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल, जिसमें हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) देशों के अधिकारी और नाविक एक साथ नौकायन और काम करते हैं, समुद्री वातावरण की एक साझा समझ विकसित करने में सहायक होती हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘जब वे एकसाथ नौकायन करते हैं और मिलकर काम करते हैं, तो वे जिस समुद्री वातावरण को देखते हैं—चाहे इलेक्ट्रॉनिक तरीके से या अपनी आंखों से—वह एक समान होता है। इसलिए, उनके बीच एक साझा समझ होती है, जिससे स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे के विचारों की अधिक स्वीकृति होगी और सहभागी देशों के बीच अंतर-संचालनीयता बढ़ेगी।”
क्षेत्र में उभरती चुनौतियों पर, एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि हिंद महासागर का विशाल विस्तार जो विश्व का तीसरा सबसे बड़ा महासागर है, लगातार निगरानी को एक बड़ी चुनौती बनाता है।
उन्होंने विशेष रूप से मादक पदार्थ के व्यापार, मानव तस्करी और समुद्री आतंकवाद जैसे मुद्दों से निपटने के लिए वास्तविक समय में सूचनाओं के आदान-प्रदान की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा, “कई मामलों में, विशेष रूप से मादक पदार्थ के व्यापार, मानव तस्करी और समुद्री आतंकवाद जैसे मुद्दों में, वास्तविक समय में सूचनाओं का आदान-प्रदान आवश्यक है। ऐसा नहीं है कि यह अतीत में नहीं हुआ है—ऐसे सफल उदाहरण हैं जब कुछ देशों ने मिलकर काम किया है और यह सुनिश्चित किया है कि कुछ अवैध गतिविधियां सफल ना हों।”
नौसेना प्रमुख ने कहा कि मुख्य चुनौती क्षमता की सीमाएं है। उन्होंने कहा, ‘एक जिम्मेदार राष्ट्र होने के नाते, हमें साझेदार देशों की क्षमता निर्माण संबंधी किसी भी गतिविधि का समर्थन करने में गर्व है, जो उनके अनुरोध और विभिन्न स्तरों पर होने वाली चर्चाओं पर आधारित होगा।’’
भाषा अमित रंजन
रंजन

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