न्यायमूर्ति मेहता का सीजेआई को राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ पत्र

न्यायमूर्ति मेहता का सीजेआई को राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ पत्र

न्यायमूर्ति मेहता का सीजेआई को राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ पत्र
Modified Date: August 26, 2026 / 05:30 pm IST
Published Date: August 26, 2026 5:30 pm IST

नयी दिल्ली, 26 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश संदीप मेहता ने राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा पर अदालत में गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं और मामलों को चुनिंदा रूप से सूचीबद्ध किए जाने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत से राजस्थान उच्च न्यायालय के लिए “तत्काल प्रभाव से” राज्य के बाहर से एक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करने का आग्रह किया है।

न्यायमूर्ति मेहता ने प्रधान न्यायाधीश को दो अगस्त, 10 अगस्त और 17 अगस्त को लिखे तीन पत्रों में न्यायमूर्ति शर्मा पर “कुप्रबंधन”, “गलत तौर-तरीके अपनाने”, “भाई-भतीजावाद में शामिल होने” और “पक्षपात करने” का आरोप लगाया है।

उन्होंने दावा किया है कि न्यायमूर्ति शर्मा ने “मास्टर ऑफ द रोस्टर” के रूप में अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया और अमीर एवं रसूखदार पक्षकारों से जुड़े मामलों समेत कई प्रमुख मामलों को चुनिंदा तरीके से अपनी ही पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया।

“मास्टर ऑफ द रोस्टर” से आशय पीठों और मामलों के आवंटन का अधिकार रखने वाले मुख्य न्यायाधीश से है।

न्यायमूर्ति मेहता को मई 2011 में राजस्थान उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। वह फरवरी 2023 में गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बनाए गए थे। उसी साल नवंबर में उन्हें उच्चतम न्यायालय में पदोन्नत किया गया था।

न्यायमूर्ति शर्मा को नवंबर 2016 में राजस्थान उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। जनवरी 2022 में उनका तबादला पटना उच्च न्यायालय कर दिया गया था।

स्वास्थ्य संबंधी कारणों से राजस्थान वापस भेजे जाने के न्यायमूर्ति शर्मा के अनुरोध को मार्च 2023 में उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम ने स्वीकार नहीं किया। इसके बजाय उन्हें पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया।

बाद में उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम ने मई 2025 में न्यायमूर्ति शर्मा को राजस्थान वापस भेजे जाने की सिफारिश की। सितंबर 2025 में राजस्थान उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एस श्रीराम के सेवानिवृत्त होने के बाद न्यायमूर्ति शर्मा पिछले 10 महीने से अधिक समय से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में काम कर रहे हैं।

न्यायमूर्ति मेहता ने इससे पहले भी सीजेआई के संज्ञान में ऐसे कई मामले लाए थे, जिनमें दूसरी पीठों के समक्ष सूचीबद्ध मामलों को बाद में “बिना किसी वाजिब वजह के” वापस लेकर न्यायमूर्ति शर्मा की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया।

न्यायमूर्ति मेहता की ओर से लिखे पत्रों के मुताबिक, न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने शुरू में उनसे ऐसे मामलों की जानकारी मांगी थी, लेकिन बाद में उनसे कहा कि आरोपों को लिखित रूप में देने की कोई जरूरत नहीं है और भरोसा दिलाया कि “उचित कार्रवाई” की जाएगी।

दो अगस्त को भेजे पत्र में न्यायमूर्ति मेहता ने लिखा है, “हालांकि, मेरे मूल उच्च न्यायालय में किसी दूसरे राज्य से मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करने के अनुरोध पर अब तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है।”

न्यायमूर्ति मेहता ने कहा कि उन्हें न्यायमूर्ति शर्मा के न्यायिक कामकाज के बारे में भी शिकायतें मिली हैं, जो उनकी राय में “प्रथम दृष्टया उनकी ईमानदारी पर संदेह पैदा करती हैं।”

दस अगस्त को लिखे पत्र में न्यायमूर्ति मेहता ने दो मामलों का जिक्र करते हुए इन्हें इस बात का “जीता-जागता सबूत” बताया कि न्यायमूर्ति शर्मा ने 26 सितंबर को सेवानिवृत्त होने से पहले प्रभावशाली पक्षों के फायदे के लिए अपनी प्रशासनिक और न्यायिक शक्तियों का इस्तेमाल करने की कोशिश की।

उन्होंने कहा, “ये मामले दिखाते हैं कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा ने प्रभावशाली पक्षों को फायदा पहुंचाने के लिए अपनी शक्तियों का खुलेआम दुरुपयोग किया और इनसे भ्रष्टाचार की बू आती है।”

न्यायमूर्ति मेहता ने 17 अगस्त को भेजे पत्र में राजस्थान उच्च न्यायालय के कामकाज और अधीनस्थ अदालतों के न्यायाधीशों के साथ किए जाने वाले व्यवहार को लेकर चिंताएं जताई हैं।

उन्होंने जोधपुर जिला अदालत (मेट्रो) की इमारत को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि यह लगभग एक साल से कामकाज के लिए पूरी तरह तैयार है।

पत्र में कहा गया है कि न्यायमूर्ति शर्मा ने एक दौरे के दौरान इमारत का उद्घघाटन टाल दिया और इसके ढांचे में बड़े पैमाने पर बदलाव करने का आदेश दिया।

न्यायमूर्ति मेहता ने कहा कि यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब जोधपुर मेट्रो न्यायिक जिले की कई अदालतें अभी भी किराये के भवनों में संचालित की जा रही हैं। उन्होंने इससे होने वाले संस्थागत नुकसान को “अक्षम्य” बताया।

पत्र के मुताबिक, न्यायमूर्ति मेहता और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश विजय बिश्नोई के अनुरोध पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने आखिरकार 15 अगस्त को 40 अदालत कक्ष वाली इस इमारत का उद्घाटन किया।

पत्र में न्यायमूर्ति मेहता ने 31 जुलाई से दो अगस्त तक जयपुर में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को लेकर भी राजस्थान उच्च न्यायालय के प्रशासन की आलोचना की है।

उन्होंने दावा किया है कि इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उच्च न्यायालय के लगभग सभी न्यायाधीशों को नामित किया गया था, जिससे जोधपुर स्थित मुख्य पीठ में दो दिनों तक किसी भी अदालत में कोई कामकाज नहीं हुआ।

पत्र के अनुसार, कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए लगभग 20-22 जिला न्यायाधीशों को भी नामित किया गया था, जिसके चलते संबंधित जिले में उसके सबसे वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी मौजूद नहीं थे।

न्यायमूर्ति मेहता ने कहा कि राजस्थान की यात्रा के दौरान राजस्थान उच्च न्यायालय के कई न्यायाधीशों ने उनसे संपर्क किया और न्यायमूर्ति शर्मा के व्यवहार को लेकर चिंता जताई, जिसमें कथित तौर पर तबादले की धमकी देना भी शामिल था।

भाषा पारुल मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में