Justice Yashwant Varma Cash Case: इस मामले में बुरे फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा, उन पर लगे आरोप साबित, अब महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी!

Justice Yashwant Varma Cash Case: इस मामले में बुरे फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा, उन पर लगे आरोप साबित, अब महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी!

Justice Yashwant Varma Cash Case: इस मामले में बुरे फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा, उन पर लगे आरोप साबित, अब महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी!

Justice Yashwant Varma Cash Case: इस मामले में बुरे फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा, उन पर लगे आरोप साबित, अब महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी! /image: Social Media

Modified Date: August 12, 2026 / 09:04 pm IST
Published Date: August 12, 2026 9:04 pm IST
HIGHLIGHTS
  • जांच समिति के अनुसार जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ तीनों आरोप साबित हुए हैं
  • जली हुई नकदी मिलने के मामले में अघोषित कैश को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की बात सामने आई
  • सूत्रों के मुताबिक उन्हें पद से हटाने के लिए शीतकालीन सत्र में महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है

नई दिल्ली। Justice Yashwant Varma Cash Case: जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास बीते साल 4 मार्च 2025 की रात भीषण आग लगी थी, इस दौरान  दमकलकर्मियों को एक स्टोर रूम में बड़ी मात्रा में जली हुई नकदी मिली थी। मामले में वर्मा को इस्तीफा दें देना पड़ा था। अब वर्मा के खिलाफ लगाए गए तीनों आरोप साबित हो गए हैं। जिसके बाद अब खबर है कि जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ शीतकालीन सत्र में महाभियोग (Yashwant Varma Impeachment) प्रस्ताव ला जा सकता है।

स्टोररूम से मिले थे भारी कैश

नई दिल्ली स्थित 30 आवासीय परिसर के स्टोररूम से 500 के नोटों के रूप में बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी। समिति के अनुसार, जज जस्टिस यशवंत वर्मा मिले कैश के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। जिसे देखते हुए समिति ने इस आरोप को सिद्ध माना।

सबूतों के संरक्षण में लापरवाही

समिति ने पाया कि मामले से जुड़े सबूतों को सही तरीके से सुरक्षित और संरक्षित नहीं रखा गया। सील करने से पहले स्टोररूम की स्थिति में बदलाव किए जाने की बात सामने आई। बाद में कुछ नोटों (Burnt Cash Case) के गायब होने का भी स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं मिला। इससे ये साबित नहीं होता की जज ने खुद नोट को हटाया।

टालमटोल वाला जवाब

जज (Yashwant Varma Latest News) की ओर से दिए गए जवाब को समिति ने संतोषजनक नहीं माना। समिति के अनुसार, उनका रुख टालमटोल वाला रहा और वह संस्थागत जिम्मेदारी तथा अपेक्षित स्पष्टता के अनुरूप नहीं था।

लाया जा सकता है महाभियोग प्रस्ताव

जांच समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज और सबूत सक्षम प्राधिकारी को सौंप दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक अब जस्टिस वर्मा को पद से हटाने के लिए शीतकालीन सत्र में महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है। आपको बता दें जस्टिस वर्मा इस साल अप्रैल में राष्ट्रपति को इस्तीफा भेज चुके हैं। इसके बावजूद उनका नाम इलाहाबाद हाई कोर्ट की सूची में शामिल है।

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सवाल आपका है... 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई मीडिया संस्थानों में अपना योगदान दिया है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर की डिग्री ली है.