कर्नाटक:विवेक कक्षाओं को भगवा रंग से रंगने को लेकर कांग्रेस ने भाजपा की आलोचना की

कर्नाटक:विवेक कक्षाओं को भगवा रंग से रंगने को लेकर कांग्रेस ने भाजपा की आलोचना की

कर्नाटक:विवेक कक्षाओं को भगवा रंग से रंगने को लेकर कांग्रेस ने भाजपा की आलोचना की
Modified Date: November 29, 2022 / 08:50 pm IST
Published Date: November 15, 2022 9:43 pm IST

बेंगलुरु, 15 नवंबर (भाषा) कर्नाटक में कांग्रेस ने हजारों ‘विवेक’ कक्षाओं को भगवा रंग से रंगने के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के फैसले की आलोचना करते हुए मंगलवार को कहा कि सत्तारूढ़ दल के नेताओं को पहले अपने घरों को इस रंग से रंगना चाहिए।

कांग्रेस की कर्नाटक इकाई ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘स्कूलों को भगवा रंग से रंगना चाह रही भाजपा को इन सवालों का जवाब देना होगा। भाजपा नेताओं ने अपनी कार और घरों को भगवा रंग से क्यों नहीं रंगा? उन्होंने अपने घर की चारदीवारी को भगवा रंग से क्यों नहीं रंगा? उन्हें पहले अपने घरों को भगवा रंग से रंगना चाहिए…।’’

कर्नाटक सरकार ने विवेक योजना के तहत पूरे राज्य में 7,601 कक्षाओं का निर्माण करने का प्रस्ताव किया है। इस योजना का नामकरण स्वामी विवेकानंद के नाम पर किया गया है।

मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने बाल दिवस के अवसर पर सोमवार को कलबुर्गी जिले के मड़ियाल में सरकारी उच्चतर प्राथमिक विद्यालय में आधारशिला रखकर इस योजना की शुरुआत की।

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राज्य शिक्षा के क्षेत्र में फिसल कर 14वें स्थान पर आ गया है और विद्यालय बुनियादी ढांचे के सूचकांक में 29वें स्थान पर आ गया है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि स्कूलों में शौचालय के मामले में राज्य 2017-18 में 13वें स्थान से लुढ़क कर अब 20वें स्थान पर आ गया है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने कहा, ‘‘इस भगवाकरण के संबंध में, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि यह भाजपा का पैसा नहीं है, बल्कि जनता का पैसा है। क्या लोगों ने भगवाकरण की मांग की है या उन्हें ऐसा करने का जनादेश मिला है? क्या उन्हें इतिहास से छेड़छाड़ करने का जनादेश मिला है? ’’

बोम्मई ने सरकार के कदम का बचाव करते हुए कहा, “भगवा रंग के नाम से लोग (गुस्से से) लाल क्यों हो जाते हैं? भगवा रंग में क्या गलत है? (राष्ट्रीय) ध्वज में भगवा रंग है। स्वामी विवेकानंद भी भगवा वस्त्र पहनते थे।”

बोम्मई ने आरोप लगाया, “वे (कांग्रेस) शिक्षा के व्यापक विकास में रुचि नहीं रखते हैं।”

भाषा रवि कांत सुभाष

सुभाष


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