कांग्रेस में सत्ता संघर्ष के कारण कर्नाटक सरकार ‘कोमा जैसी स्थिति’ में : नेता प्रतिपक्ष अशोक
कांग्रेस में सत्ता संघर्ष के कारण कर्नाटक सरकार ‘कोमा जैसी स्थिति’ में : नेता प्रतिपक्ष अशोक
हासन (कर्नाटक), 26 मई (भाषा) कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस के आंतरिक नेतृत्व संघर्ष पर निशाना साधते हुए मंगलवार को दावा किया कि इस सत्ता संघर्ष ने सरकार को “कोमा की स्थिति” में धकेल दिया है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता अशोक ने राज्य में प्रशासन के “पूरी तरह चरमरा जाने” का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस का इतना ‘कमजोर’ है कि वह मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उनके उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच जारी सत्ता संघर्ष को सुलझाने में सक्षम नहीं है।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब सिद्धरमैया और शिवकुमार कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात के लिए नयी दिल्ली में हैं।
अशोक ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने कहा था कि मंत्रियों को हर 15 दिन में एक बार जिलों का दौरा करना होगा, लेकिन मुख्यमंत्री खुद इसका पालन नहीं कर रहे हैं। कोई भी अपने जिले में जाकर जनता की शिकायतों का समाधान नहीं कर रहा है, सब दिल्ली के दौरे पर हैं… कहा जा रहा है कि शिकायत निवारण बैठकें नहीं हो रही हैं। सब दिल्ली के दौरे पर हैं।”
उन्होंने यहां पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस में आंतरिक सत्ता संघर्ष ने सरकार को “कोमा की स्थिति” में धकेल दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रशासन पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। राज्य के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने पहले चेतावनी दी थी कि सत्ता संघर्ष प्रशासन के पतन का कारण बन सकता है, लेकिन प्रशासन के पतन को एक साल हो चुका है।’’
सदन में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि किसी को नहीं पता कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा या किसे पद से हटाया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘सबसे बड़ा सवाल यह है कि कौन रहेगा, कौन जाएगा? लोग इस मुद्दे से थक चुके हैं। कांग्रेस पार्टी का उच्च कमान कमजोर है…वे नेतृत्व के मुद्दे पर कोई निर्णय लेने में विफल रहे हैं, जिसके कारण प्रशासन ध्वस्त हो गया है।’’
सत्ता के लिए आंतरिक कलह के बीच जनता को त्यागने का आरोप लगाते हुए अशोक ने कांग्रेस नेताओं से दिल्ली यात्रा में कटौती करके बेंगलुरु लौटने तथा राज्य के मुद्दों से निपटने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि राज्य की जनता के लिए मौजूदा सरकार प्रभावी रूप से “मृत” हो चुकी है।
भाषा प्रशांत सुरेश
सुरेश

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