कर्नाटक सरकार ने राज्य संचालित मंदिरों में चढ़ावे की सुरक्षा, पारदर्शिता के लिए एसओपी जारी किया
कर्नाटक सरकार ने राज्य संचालित मंदिरों में चढ़ावे की सुरक्षा, पारदर्शिता के लिए एसओपी जारी किया
बेंगलुरु, 13 जुलाई (भाषा) कर्नाटक सरकार ने राज्य की ओर से संचालित मंदिरों में चढ़ावे की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है, जिसमें परिसर में सीसीटीवी या वेब कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है और दान के लिए क्यूआर कोड आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली अपनाने पर जोर दिया गया है।
यह एसओपी ऐसे समय में जारी किया गया है, जब अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का कथित मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पिछले हफ्ते अधिकारियों को राज्यभर में हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती (मुजराई) विभाग से जुड़े सभी बड़े मंदिरों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया।
सरकार की ओर से जारी एक अधिसूचना के मुताबिक, “अधिकारियों के संज्ञान में आया है कि देश के अलग-अलग राज्यों में मंदिरों के दान-पात्रों से चोरी की कई घटनाएं सामने आई हैं और मीडिया में इनकी काफी चर्चा है।”
अधिसूचना में कहा गया है, “राज्य में धार्मिक बंदोबस्ती विभाग के अधिकार क्षेत्र में आने वाले मंदिरों में हुंडी (दान-पात्र) से चढ़ाए गए पैसों और कीमती सामान की गिनती और हिसाब-किताब रखने के दौरान उनके गलत इस्तेमाल और चोरी के मामले भी सामने आए हैं।”
इसमें कहा गया है कि ऐसे में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे राज्य भर के मंदिरों की चल संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एहतियाती उपाय लागू करें।
अधिसूचना के अनुसार, मंदिरों में चढ़ावे की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उन्हें सहेजने के वास्ते परिसर के भीतर उपयुक्त जगहों की पहचान करना, लोगों को आसानी से दिखाई देने वाली जगहों पर हुंडी लगाना और उन्हें (हुंडी को) पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराना शामिल है।
अधिसूचना में कहा गया है कि हुंडी की चारों तरफ से झलक दिखाने वाले सीसीटीवी/वेब कैमरे लगाना अनिवार्य है।
इसमें कहा गया है कि कैमरे में रिकॉर्ड किए गए फुटेज को सर्वर पर सुरक्षित रूप से सहेजा जाएगा और मुजराई विभाग की ओर से उपायुक्त और उपमंडल अधिकारियों के कार्यालयों में सीसीटीवी फुटेज की लगातार निगरानी की जाएगी।
अधिसूचना में कहा गया है कि चूंकि मंदिरों में पहले से लगे सीसीटीवी कैमरे और डीवीआर चोरी, निष्क्रिय या खराब किए जा रहे हैं और कपूर जलाकर कैमरे के लेंस पर कार्बन जमाकर और दृश्यता बाधित करके चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है, इसलिए परिसर में सीसीटीवी वेब कैमरे लगाए जाने चाहिए।
इसमें कहा गया है कि धार्मिक बंदोबस्ती विभाग के मुख्यालय में एक केंद्रीय सर्वर स्थापित किया जाना चाहिए, जिसमें फुटेज को केंद्रीय स्तर पर सहेजा जाएगा और उस पर लगातार नजर रखी जाएगी।
अधिसूचना के मुताबिक, मंदिर परिसर में चोरी की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए चढ़ावे के वास्ते क्यूआर कोड आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली को बढ़ावा दिया जाएगा।
इसमें कहा गया है कि क्यूआर कोड डिस्प्ले में संबंधित बैंक की आईएफएससी कोड सहित अन्य सभी जरूरी जानकारियां भी प्रदर्शित की जाएंगी।
अधिसूचना के अनुसार, पारदर्शिता और बेहतर वित्तीय प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल भुगतान प्रणाली को मंदिर की लेखा प्रणाली के साथ जोड़ा जाएगा।
इसमें कहा गया है कि हुंडी की गिनती के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की अनिवार्य मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए तारीखें पहले से तय की जाएंगी और उन्हें आधिकारिक कैलेंडर में शामिल किया जाएगा।
अधिसूचना में कहा गया है कि बड़े पैमाने पर चढ़ावा हासिल करने वाले मंदिरों में हुंडी की गिनती हफ्ते में एक बार की जाएगी। इसमें कहा गया है कि जिन मंदिरों में ठीक-ठाक मात्रा में या नियमित रूप से चढ़ावा आता है, वहां हर दो हफ्ते में एक बार गिनती की जाएगी।
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि हुंडी गिनती की प्रक्रिया संबंधित तहसीलदार की देखरेख में होगी।
इसमें कहा गया है कि गिनती के दौरान सोने, चांदी या अन्य कीमती धातुओं की वस्तुओं का मूल्य उसी दिन आंका जाएगा और उन्हें उचित देखरेख में उसी दिन संबंधित जिला ट्रेजरी या सब-ट्रेजरी में जमा कर दिया जाएगा।
अधिसूचना के मुताबिक, गिनती की प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों और अधिकारियों के सत्यापन के लिए ‘चेहरा मिलान प्रणाली’ लागू की जाएगी। इसमें कहा गया है कि हुंडी गिनती क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को अपने पास मौजूद नकदी की जानकारी देनी होगी।
अधिसूचना के अनुसार, हुंडी खोले जाने से लेकर गिनी हुई नकदी को बैंक को सौंपे जाने तक की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग करना अनिवार्य होगा, जिसमें तारीख और समय साफ तौर पर दर्ज होना चाहिए।
इसमें कहा गया है कि हुंडी की गिनती के लिए आम लोगों को शामिल करने के बजाय होमगार्ड, बैंक कर्मचारियों या सरकारी कर्मचारियों की सेवाओं का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल किया जाएगा।
अधिसूचना में कहा गया है कि गिनती के दौरान या हुंडी से चोरी होने की स्थिति में संबंधित मंदिर अधिकारी और जिम्मेदार तालुक-स्तरीय अधिकारी सीधे तौर पर जवाबदेह होंगे।
भाषा पारुल नरेश
नरेश

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