बेंगलुरु, 18 अगस्त (भाषा) कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार के निलंबन को रद्द कर दिया और अधिकारियों को सात दिन के भीतर उन्हें उनके पद पर बहाल करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज ने टिप्पणी की कि संविधान के अनुच्छेद 317(2) के तहत साहूकार को निलंबित करने का सरकार का फैसला, मंत्रिपरिषद की पूर्व सहायता और सलाह के बिना राज्यपाल द्वारा स्वतंत्र रूप से नहीं लिया जा सकता था।
अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका निर्णय साहूकार को निलंबित करने में अपनाई गई संवैधानिक प्रक्रिया तक ही सीमित है और उन आरोपों की जांच नहीं की गई है जो उन पर लगाए गए थे।
यह आदेश साहूकार की उस याचिका पर आया जिसमें उन्होंने अपने निलंबन और उन पर लगे आरोपों की अनुच्छेद 317(1) के तहत उच्चतम न्यायालय से जांच कराने के लिए राज्यपाल की राष्ट्रपति से की गई सिफारिश को चुनौती दी थी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि साहूकार कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के अध्यक्ष के तौर पर अपना काम फिर से शुरू करने और निलंबन रद्द होने से सेवा के दौरान मिलने वाले आर्थिक लाभ पाने के हकदार होंगे।
अदालत ने हालांकि साहूकार को अपनी बेटियों के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई से जुड़े किसी भी फैसले में शामिल होने या उसे प्रभावित करने से रोक दिया। केपीएससी को लेकर उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई थी जब राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 13 जुलाई को साहूकार को निलंबित कर दिया था। साहूकार पर अपनी दो बेटियों के ‘इंडस्ट्रियल एक्सटेंशन ऑफिसर’ के तौर पर गैर-कानूनी तरीके से चयन में मदद करने का आरोप है।
भाषा धीरज वैभव
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