करूर भगदड़ मामला: गवाहों को प्रभावित करने के आरोपों वाली याचिका पर सात जुलाई को सुनवाई
करूर भगदड़ मामला: गवाहों को प्रभावित करने के आरोपों वाली याचिका पर सात जुलाई को सुनवाई
नयी दिल्ली, छह जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल तमिलनाडु के करूर में हुई भगदड़ की घटना के मामले में राज्य के मंत्रियों द्वारा गवाहों को ‘‘सक्रिय रूप से प्रभावित करने’’ के आरोपों वाली याचिका को सात जुलाई को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति शील नागू की आंशिक कार्यदिवस पीठ ने मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई। वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी ने पीठ को बताया था कि अदालत ने भगदड़ की घटना की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने का आदेश दिया था, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी।
अहमदी ने कहा, ‘‘इस अदालत ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। अब कुछ आरोपी, जो मौजूदा सरकार में मंत्री हैं, गवाहों को सक्रिय रूप से प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। हमने इस संबंध में एक अर्जी दाखिल की है।’’
पीठ ने कहा, ‘‘हम कल इस पर सुनवाई करेंगे।’’
पिछले साल 13 अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय ने भगदड़ की घटना की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। अदालत ने कहा कि इस घटना ने देश को झकझोर कर रख दिया और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कषगम’ (टीवीके) की स्वतंत्र जांच के अनुरोध वाली याचिका पर आदेश देते हुए शीर्ष अदालत ने सीबीआई जांच की निगरानी के लिए अपने पूर्व न्यायाधीश अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एक निगरानी समिति भी गठित की थी।
एसआईटी और एकल सदस्यीय जांच आयोग की नियुक्ति के निर्देशों पर रोक लगाते हुए शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु सरकार से कहा था कि वह केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों को पूरा सहयोग दे।
भाषा सुरभि नरेश
नरेश

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