यादवपुर विश्वविद्यालाय में ‘कश्मीर मांगे आजादी’, ‘लाल सलाम’ वाली ताकतों को उखाड़ फेंकेंगे : शुभेंदु

यादवपुर विश्वविद्यालाय में ‘कश्मीर मांगे आजादी’, ‘लाल सलाम’ वाली ताकतों को उखाड़ फेंकेंगे : शुभेंदु

यादवपुर विश्वविद्यालाय में ‘कश्मीर मांगे आजादी’, ‘लाल सलाम’ वाली ताकतों को उखाड़ फेंकेंगे : शुभेंदु
Modified Date: September 9, 2026 / 07:30 pm IST
Published Date: September 9, 2026 7:30 pm IST

कोलकाता, नौ सितंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने यादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में “कश्मीर मांगे आजादी” और “लाल सलाम” जैसे नारे लगाने वाली ताकतों को “उखाड़ फेंकने” का बुधवार को संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि वह भगवा रंग का किसी भी तरह से अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे।

शुभेंदु ने दक्षिण कोलकाता में गोलपार्क से यादवपुर विश्वविद्यालय परिसर के पास 8बी बस स्टैंड तक लगभग तीन किलोमीटर लंबी ‘गेरुआ सम्मान यात्रा’ निकाली। उन्होंने परिसर के बाहर जुटे लोगों को संबोधित करते हुए यादवपुर विश्वविद्यालय को श्री अरबिंदो की कर्मभूमि बताया।

शुभेंदु ने कहा, “मैं भगवा रंग का अपमान बर्दाश्त नहीं करूंगा। मैंने स्पष्ट संदेश दे दिया है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री जानते हैं कि यादवपुर से ‘कश्मीर मांगे आजादी’ और ‘लाल सलाम’ को कैसे मिटाना है।”

उन्होंने कहा, “मैंने संकल्प लिया है कि मैं श्री अरबिंदो की कर्मभूमि और उत्कृष्टता के केंद्र यादवपुर से उन ताकतों को उखाड़ फेंकूंगा, जो ‘कश्मीर मांगे आजादी’ जैसे नारे लगाते हैं और जिन्होंने किसान आंदोलन का समर्थन किया है।”

शुभेंदु ने कहा कि वह उस इलाके का फिर से दौरा करेंगे।

उन्होंने कहा कि जो लोग भगवा रंग का अपमान करते हैं, उन्हें धार्मिक कार्यक्रमों के जरिये “सबक सिखाया” जाना चाहिए।

शुभेंदु ने कहा, “मैं गीता और हनुमान चालीसा के पाठ के जरिये उन्हें सबक सिखाने के लिए फिर आऊंगा।”

उन्होंने कहा, “यह स्वामी विवेकानंद की भूमि है और यहां भगवा रंग हमेशा कायम रहेगा।”

शुभेंदु ने तीन दिन के वैदिक पाठ कार्यक्रम की भी घोषणा की और लोगों से इसमें बड़ी संख्या में हिस्सा लेने की अपील की।

केसरिया रंग का कुर्ता पहने और भगवा झंडा थामे शुभेंदु के नेतृत्व में निकाली गई ‘गेरुआ सम्मान यात्रा’ में नगा साधुओं समेत बड़ी संख्या में साधु-संतों और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थकों ने हिस्सा लिया। उन्होंने ‘जय श्रीराम’ के नारे भी लगाए।

एक नगा साधु ने इस मुद्दे को उठाने के लिए शुभेंदु का आभार जताते हुए पूछा, “हमने देश के लिए जान दी है और अपने धर्म की रक्षा के लिए हथियार उठाए हैं। हमारा अपमान क्यों किया जा रहा है?”

भाजपा के एक नेता ने कहा कि यह यात्रा “भगवा रंग की गरिमा की रक्षा” करने और “इसे बदनाम करने की कोशिशों” का विरोध करने के लिए निकाली गई है।

उन्होंने कहा कि भगवा रंग भारत की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है तथा ‘गेरुआ सम्मान यात्रा’ का मकसद इस रंग से जुड़े मूल्यों, आदर्शों और गरिमा के बारे में जागरूकता फैलाना है।

यह यात्रा यादवपुर विश्वविद्यालय में वामपंथी छात्र संगठनों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में जारी राजनीतिक और वैचारिक लड़ाई की पृष्ठभूमि में निकाली गई, जहां हाल के दिनों में दोनों पक्षों में झड़पें हुई हैं और उनके बीच एक-दूसरे के खिलाफ भित्तिचित्र बनाने की होड़ और नारेबाजी भी तेज हो गई है।

गेरुआ सम्मान यात्रा’ शुभेंदु के यादवपुर विश्वविद्यालय परिसर के बाहर एक कार्यक्रम में शामिल होने के दो हफ्ते से भी कम समय बाद आयोजित की गई, जिसमें लगभग 10,000 लोगों ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाया था।

शुभेंदु ने कार्यक्रम में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस, दोनों पर निशाना साधते हुए उन पर “राष्ट्रवाद को लोगों की चेतना से मिटने देने” का आरोप लगाया था।

भाषा पारुल नरेश

नरेश


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