Kashmir Donation Iran: ईरान के लिए कश्मीरियों का ‘सॉफ्ट कॉर्नर’, 600 करोड़ से ज्यादा का फंड जुटाया, पर क्या ये मदद कभी पहुंचेगी जरूरतमंदों तक?
Kashmir Donation Iran: ईरान के लिए कश्मीरियों का 'सॉफ्ट कॉर्नर', 600 करोड़ से ज्यादा का फंड जुटा, पर क्या ये मदद कभी पहुंचेगी जरूरतमंदों तक?
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- कश्मीर-लद्दाख में बड़ा डोनेशन अभियान
- लोगों ने दिल खोलकर दान दिया
- अनोखी नीलामी ने सबको चौंकाया
Kashmir Donation Iran: नई दिल्ली: कश्मीर घाटी और लद्दाख में ईरान के लोगों की मदद के लिए चलाया जा रहा डोनेशन अभियान इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। बीते एक महीने में लोगों ने जिस तरह दिल खोलकर योगदान दिया है, उसने सभी को हैरान कर दिया है। Srinagar से लेकर Leh और कारगिल तक इस अभियान में आम लोगों की भागीदारी देखने को मिली।
Kashmir donation campaign: 600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई गई
नकद रकम के अलावा सोना-चांदी, जमीन, पालतू जानवर, बाइक और कारें तक दान में दी गईं। बताया जा रहा है कि इस अभियान के जरिए अब तक 600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई जा चुकी है, जो ईरान के लोगों के प्रति गहरे भावनात्मक और धार्मिक जुड़ाव को दर्शाता है।
Ladakh Iran relief fund: अंडे की नीलामी 25,000 रुपये तक पहुंची
इस अभियान के दौरान कई ऐसी नीलामियां हुईं, जिन्होंने लोगों को चौंका दिया। लेह में अंजुमन इमामिया और मजलिस-ए-उलेमा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में एक अंडे की नीलामी 25,000 रुपये तक पहुंच गई, जबकि कुछ जगहों पर इसकी कीमत 6,000 रुपये तक भी देखी गई। वहीं कारगिल जिले के गुंड मंगलपुर इलाके में एक मुर्गा 1.25 लाख रुपये में नीलाम हुआ। इसके अलावा श्रीनगर के डल झील स्थित मीर बेहरी इलाके में 50 पैसे का एक पुराना सिक्का 17,000 रुपये में बिका। इस सिक्के को एक पांच साल के बच्चे ने अपने गुल्लक से दान किया था, जिसे स्थानीय निवासी जावेद अहमद सूफी ने ऊंची बोली लगाकर खरीदा। इन उदाहरणों ने यह दिखाया कि लोगों के लिए दान की कीमत नहीं, बल्कि भावना ज्यादा मायने रखती है।
Iran war News: जुटाई गई राशि अभी तक ईरान तक नहीं पहुंच पाई है
हालांकि इस अभियान में जुटाई गई राशि अभी तक ईरान तक नहीं पहुंच पाई है। जानकारी के मुताबिक, यह पैसा भारत में मौजूद ईरानी दूतावास के आधिकारिक खाते में जमा किया जा रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग पाबंदियों के चलते Reserve Bank of India ने इस खाते पर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं। इसके कारण यह पूरी रकम फिलहाल भारत में ही अटकी हुई है। इसके बावजूद कश्मीर और लद्दाख के लोग लगातार इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
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