केरल : पटाखा इकाई में विस्फोट का असर त्रिशूर पूरम उत्सव पर पड़ा

केरल : पटाखा इकाई में विस्फोट का असर त्रिशूर पूरम उत्सव पर पड़ा

केरल : पटाखा इकाई में विस्फोट का असर त्रिशूर पूरम उत्सव पर पड़ा
Modified Date: April 23, 2026 / 04:22 pm IST
Published Date: April 23, 2026 4:22 pm IST

त्रिशूर/कोट्टायम (केरल), 23 अप्रैल (भाषा) केरल के मुंडाथिकोड स्थित पटाखा निर्माण इकाई में कुछ दिन पहले हुए विस्फोट में 14 लोगों की जान चली जाने के मद्देनजर त्रिशूर पूरम उत्सव में आतिशाबाजी का कार्यक्रम नहीं होगा, हालांकि धार्मिक अनुष्ठान पूर्व की तरह ही होंगे। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

यह निर्णय राज्य सरकार की एक बैठक में लिया गया, जिसमें मंत्री, सांसद सुरेश गोपी, जिलाधिकारी और परमेकावु देवस्वओम और थिरुवंबडी देवस्वओम के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

त्रिशूर पूरम 26 अप्रैल को आयोजित होने वाला है।

परमेकावु देवस्वओम के सचिव जी राजेश ने बताया कि उत्सव के सभी अनुष्ठान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही होंगे। उन्होंने कहा कि पूरम का अहम हिस्सा माने जाने वाले आतिशबाजी कार्यक्रम का आयोजन नहीं होगा, केवल प्रतीकात्मक रूप से केवल एक बार पटाखे छोड़े जाएंगे।

मुंडाथिकोड स्थित पटाखा निर्माण इकाई में मंगलवार शाम उस समय विस्फोट हो गया, जब थिरुवंबडी देवस्वओम के लिए पटाखे तैयार किए जा रहे थे। विस्फोट में 14 लोगों की मौत हो गई।

पटाखा निर्माण इकाई में विस्फोट के मद्देनजर, मलंकरा ऑर्थोडॉक्स सीरियन चर्च के प्रमुख बेसेलियोस मार्थोमा मैथ्यूज तृतीय, कैथोलिकोस ने लोगों से उत्सवों में संयम बरतने और फिजूलखर्ची के बजाय मानव जीवन को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

कैथोलिकोस ने एक संदेश में कहा कि केरल इस त्रासदी के कारण गहरे शोक में है। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं के बावजूद, एहतियाती उपाय अक्सर केवल अगले हादसे तक ही सीमित रह जाते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘त्योहारों और अन्य समारोहों के दौरान ऐसी दर्दनाक घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए हमें विवेकपूर्ण तरीके से कार्य करना होगा। हमें इस बात पर विचार करना होगा कि क्या क्षणिक आनंद के लिए निर्दोष लोगों की जान कुर्बान की जानी चाहिए।’’

कैथोलिकोस ने कहा, ‘‘सभी धर्मों को इस संबंध में विवेकपूर्ण और जिम्मेदाराना रुख अपनाना चाहिए। ईश्वर आतिशबाजी से प्रसन्न नहीं होते, बल्कि आस्थावान के हृदय की पवित्रता से प्रसन्न होते हैं।’’

उन्होंने सादगी से उत्सव मनाने का आह्वान करते हुए कहा कि मलंकरा चर्च संस्थानों में समारोहों को सादगी से मनाया जाना चाहिए।

भाषा आशीष सुभाष

सुभाष


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