केरल पटाखा विस्फोट : एसआईटी जांच जारी, हादसे की वजह का जल्द पता लगाया जाएगा
केरल पटाखा विस्फोट : एसआईटी जांच जारी, हादसे की वजह का जल्द पता लगाया जाएगा
(तस्वीरों के साथ)
तिरुवनंतपुरम, 22 अप्रैल (भाषा) केरल राज्य पुलिस प्रमुख रावड़ा ए. चंद्रशेखर ने बुधवार को कहा कि त्रिशूर जिले के मुंडाथिकोड स्थित एक पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट के सही कारण का पता लगाने के लिए व्यापक जांच जारी है। इस हादसे में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए हैं।
उन्होंने कहा कि जांच के लिए त्रिशूर नगर पुलिस आयुक्त के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। साथ ही, आसपास के जिलों से अतिरिक्त फॉरेंसिक दलों को भी जांच में सहायता के लिए तैनात किया गया है।
चंद्रशेखर ने यहां मीडिया से कहा, ‘‘कल पूरा ध्यान बचाव कार्यों पर था। अब हादसे के सही कारण का पता लगाने के लिए व्यापक जांच की जा रही है। आज शाम तक हम यह जान सकेंगे कि विस्फोट किस वजह से हुआ।’’
उन्होंने कहा कि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि घटना के पीछे कोई साजिश थी या नहीं, लेकिन फॉरेंसिक साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों सहित सभी पहलुओं की जांच की जाएगी।
डीजीपी ने बताया कि हादसे के समय घटनास्थल पर करीब 32 लोगों की मौजूदगी की पुष्टि हुई है, हालांकि वहां इससे अधिक लोगों के होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि घटना के तुरंत बाद त्रिशूर नगर पुलिस आयुक्त और पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) मौके पर पहुंच गए थे और उन्होंने बचाव अभियान का नेतृत्व किया। यह अभियान पुलिस, अग्निशमन बल और स्थानीय लोगों ने संयुक्त रूप से चलाया।
डीजीपी के आज विस्फोट स्थल का दौरा करने की संभावना है।
केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (केएसडीएमए) के अनुसार, मंगलवार रात तक विस्फोट में कम से कम 13 लोगों की मौत की आशंका थी, जबकि हादसे के समय कई शेड में लगभग 40 लोगों के मौजूद होने की संभावना जताई गई थी।
यह विस्फोट मंगलवार दोपहर करीब 3:30 बजे उस पटाखा निर्माण केंद्र में हुआ, जहां 26 अप्रैल को होने वाले त्रिशूर पूरम उत्सव से पहले एक मंदिर देवस्वओम के लिए पटाखे तैयार किए जा रहे थे।
स्थानीय लोगों ने बताया कि शुरुआती विस्फोट के बाद बीच-बीच में धमाके होते रहे, जिससे बचाव कार्य प्रभावित हुआ।
उन्होंने बताया कि पटाखों का निर्माण धान के खेतों के बीच बने एक अलग-थलग क्षेत्र में कई अस्थायी शेड में किया जा रहा था।
भाषा गोला मनीषा
मनीषा

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