Chhattisgarh High Court Decision : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मानसिक दिव्यांग दुष्कर्म पीड़िता को मिली गर्भपात की मंजूरी, भ्रूण के डीएनए के लिए मिले ये निर्देश

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक गंभीर मामले में सुनवाई करते हुए मानसिक रूप से दिव्यांग यौन शोषण पीड़िता को गर्भपात की अनुमति दी है। अदालत ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला सुनाया और भ्रूण का डीएनए सुरक्षित रखने के भी निर्देश दिए हैं।

Chhattisgarh High Court Decision : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मानसिक दिव्यांग दुष्कर्म पीड़िता को मिली गर्भपात की मंजूरी, भ्रूण के डीएनए के लिए मिले ये निर्देश

Chhattisgarh High Court Decision / Image Source : FILE

Modified Date: April 22, 2026 / 02:37 pm IST
Published Date: April 22, 2026 2:36 pm IST
HIGHLIGHTS
  • हाईकोर्ट का संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला
  • मानसिक रूप से दिव्यांग पीड़िता को गर्भपात की अनुमति
  • भ्रूण का DNA साक्ष्य के लिए सुरक्षित रखने का आदेश

बिलासपुर : Chhattisgarh High Court Decision  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मानसिक रूप से दिव्यांग यौन शोषण पीड़िता को गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है। न्यायालय ने मानवीय और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट किया कि पीड़िता को अनचाही प्रेग्नेंसी के लिए मजबूर करना उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति के लिए बहुत नुकसान होगा। इस मामले में कांकेर के चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर (CMHO) को सुरक्षात्मक मानकों के साथ प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

रिपोर्ट के आधार पर सुनाया फैसला

कोर्ट ने इससे पहले हुई सुनवाई में चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर (CMHO), कांकेर को एक्सपर्ट डॉक्टरों की टीम से याचिकाकर्ता की मेडिकल जांच के निर्देश दिए थे। High Court DNA Sample Instruction एक्ट 1971 के सेक्शन 3(2) के अनुसार मरीज़ की शारीरिक और मानसिक हालत, प्रेग्नेंसी का स्टेज और प्रेग्नेंसी खत्म करने के जोखिमों पर विस्तृत रिपोर्ट मंगाई गई थी। रिपोर्ट पेश होने के बाद कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता अपने गार्जियन के साथ CMHO के सामने पेश हों, जो यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 के प्रोविज़न के अनुसार गायनेकोलॉजी डिपार्टमेंट के स्पेशलिस्ट डॉक्टर सहित कम से कम दो डॉक्टरों की देखरेख में इसे खत्म किया जाए।

भ्रूण का डीएनए सुरक्षित रखा जाए

अदालत ने यह भी निर्देशित किया है कि इस प्रक्रिया के लिए सभी ज़रूरी फॉर्मैलिटीज़ पूरी करने के बाद उचित मेडिकल सुविधाएँ दी जाएँ। इसके साथ ही, कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा कि भ्रूण का डीएनए (DNA) सैंपल लेकर उसे क्रिमिनल केस के आगे के सबूत के लिए सुरक्षित रखा जाए। इस आदेश के साथ ही हाईकोर्ट ने पीड़िता के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक प्रबंध करने के आदेश दिए हैं।

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