केरल सरकार राज्य के सबसे लंबे हाथी ‘रमन’ का संरक्षण अपने हाथों में ले : न्यायालय

केरल सरकार राज्य के सबसे लंबे हाथी 'रमन' का संरक्षण अपने हाथों में ले : न्यायालय

केरल सरकार राज्य के सबसे लंबे हाथी ‘रमन’ का संरक्षण अपने हाथों में ले : न्यायालय
Modified Date: June 10, 2026 / 09:33 pm IST
Published Date: June 10, 2026 9:33 pm IST

नयी दिल्ली, 10 जून (भाषा) बेजुबान जानवरों की भलाई को जरूरी बताते हुए उच्चतम न्यायालय ने केरल सरकार को निर्देश दिया है कि वह ‘रमन’ नाम के हाथी को अपने संरक्षण में ले और उसे किसी सही पुनर्वास केंद्र में रखे। रमन को राज्य का सबसे लंबा हाथी बताया जाता है, जिसकी लंबाई 10.53 फुट है।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने गौर किया कि रमन का वाणिज्यिक इस्तेमाल किया गया है और उसे धार्मिक जुलूसों और रीति-रिवाजों में इस्तेमाल किया जाता रहा है।

न्यायालय ने कहा, “यह वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस हाथी (रमन) की बात हो रही है—जो केरल राज्य का सबसे लंबा हाथी भी है—उसका वाणिज्यिक इस्तेमाल किया गया है, जबकि इस तरह के इस्तेमाल पर रोक का आदेश था और यह रोक इस अदालत के सामने दिए गए एक शपथपत्र के आधार पर लगाई गई थी।”

पीठ ने कहा, “अगर हम ऐसी नाफरमानी को नजरअंदाज करते हैं, तो हम बेज़ुबान जानवरों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी निभाने में नाकाम रहेंगे। हम चुपचाप तमाशबीन बनकर नहीं रह सकते, खासकर उन बेजुबान जानवरों के मामले में, जिनकी भलाई भी बहुत जरूरी है।”

उच्चतम न्यायालय ने कृष्णनकुट्टी को, जिन्होंने एक विवादित वसीयत के आधार पर हाथी का संरक्षण अपने पास रखा था, न्यायालय को दिए गए वचन का जानबूझकर उल्लंघन करने के लिए अदालत की अवमानना ​​का दोषी पाया और उन पर 2,000 रुपये का जुर्माना लगाया।

न्यायालय ने साफ किया कि रमन का संरक्षण देने का उसका आदेश सिर्फ़ कुछ समय के लिए है और यह अदालत के अंतिम आदेश पर निर्भर करेगा।

उसने कहा, “केरल राज्य अपने खर्च पर हाथी की अस्थायी देखभाल करने का फैसला भी कर सकता है; ऐसी स्थिति में, वह वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत दिए गए कानूनी सुरक्षा उपायों के अनुसार उचित प्रशासनिक आदेश जारी कर सकता है।”

न्यायालय ने राज्य के अधिकारियों को अवमानना ​​के आरोप से बरी कर दिया, क्योंकि उन्होंने हाथी की चिकित्सा जांच कराने की कोशिश की थी।

पीठ जयकृष्ण मेनन की ओर से दायर अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई कर रही थी। मेनन का दावा था कि हाथी ‘माता अमृतानंदमयी मठ’ का है और उसे देखभाल के लिए कुछ समय के लिए कृष्णनकुट्टी को सौंपा गया था।

दूसरी ओर, कृष्णनकुट्टी ने दावा किया कि ‘उपहार बैनामा’ के जरिए रमन का मालिकाना हक उन्हें कानूनी तौर पर मिला था और वह पिछले 10-12 सालों से लगातार उस हाथी की देखभाल कर रहे हैं।

भाषा प्रशांत रंजन

रंजन


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