कोच्चि, तीन अगस्त (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने इस वर्ष मई में पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के आवास पर छापेमारी के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर हमला करने के कई आरोपियों को सोमवार को नियमित जमानत दे दी।
न्यायमूर्ति कौसर ई. ने आरोपियों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इस दावे के बावजूद राहत प्रदान कर दी कि यह हमला एक ‘‘समन्वित और सुनियोजित’’ था न कि अनायास था।
अदालत के विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा की जा रही है।
केंद्रीय एजेंसी ने दलील दी कि 27 मई को उसके अधिकारियों पर हुए हमले को एक साधारण कानून-व्यवस्था की घटना या अनायास घटना के रूप में नहीं देखा जा सकता, क्योंकि यह कई घंटों तक चली छापेमारी के समाप्त होने के बाद हुआ था।
ईडी की यह छापेमारी विजयन की बेटी की कंपनी और रेत खनन कंपनी ‘कोचीन मिनरल्स एंड रूचाइल लिमिटेड’ (सीएमआरएल) के बीच हुए वित्तीय लेन-देन से जुड़ी थी।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि विजयन की बेटी टी. वीणा और उनकी फर्म ‘एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस’ को 2017 से 2020 के बीच रेत खनन कंपनी सीएमआरएल से आईटी और परामर्श सेवाओं के एवज में रकम मिली थी जबकि ये सेवाएं कथित तौर पर कभी प्रदान ही नहीं की गई थीं।
हालांकि, वीणा और सीएमआरएल ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है और उनका कहना है कि यह भुगतान एक वैध व्यावसायिक समझौते का हिस्सा था।
छापेमारी के बाद जब ईडी अधिकारी वापस लौट रहे थे तभी भीड़ ने उनके वाहनों पर हमला कर दिया जिसमें एक चालक, सीआरपीएफ के एक अधिकारी और तलाशी दल का एक सदस्य कथित तौर पर घायल हो गए थे।
आरोपियों की जमानत याचिका का विरोध करते हुए अधिवक्ता जयशंकर वी. नायर के माध्यम से दायर अपने हलफनामे में ईडी ने दावा किया कि ‘‘आरोपों से स्पष्ट होता है कि धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत प्रदत्त वैधानिक अधिकारों के अनुरूप विधिसम्मत तलाशी कार्रवाई कर रहे केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों पर सुनियोजित और संगठित हमला किया गया।’’
एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि यह एक ‘‘हिंसक, पूर्व-नियोजित और राजनीतिक रूप से समन्वित हमला’’ था, जिसमें खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल किया गया था।
भाषा खारी रंजन
रंजन