केरल उच्च न्यायालय ने कुंभ मेले से चर्चा में आई लड़की को पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया

केरल उच्च न्यायालय ने कुंभ मेले से चर्चा में आई लड़की को पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया

केरल उच्च न्यायालय ने कुंभ मेले से चर्चा में आई लड़की को पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया
Modified Date: June 20, 2026 / 10:46 am IST
Published Date: June 20, 2026 10:46 am IST

कोच्चि, 20 जून (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने पुलिस को उस लड़की को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है जो प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान चर्चा में आई थी और जिसके पति पर उसके अपहरण का आरोप है।

उच्च न्यायालय ने लड़की की उस याचिका पर यह आदेश दिया जिसमें उसने राज्य सरकार और एर्णाकुलम सेंट्रल थाने के प्रभारी अधिकारी को उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया था।

अदालत ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता (लड़की) के वकील और सरकारी वकील की दलीलें सुनने के बाद प्रथम दृष्टया मेरा मानना है कि याचिकाकर्ता के जीवन की सुरक्षा की जानी चाहिए।’’

अदालत ने कहा, ‘‘इसलिए रिट याचिका का निपटारा होने तक दूसरे प्रतिवादी (थाना प्रभारी) को याचिकाकर्ता के जीवन की सुरक्षा के लिए पर्याप्त प्रबंध सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता है।’’

अदालत ने राज्य सरकार और थाना प्रभारी को नोटिस भी जारी किया तथा मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 जुलाई की तारीख तय की।

उच्च न्यायालय की एक अन्य पीठ ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि लड़की प्रथम दृष्टया बालिग प्रतीत होती है। पीठ ने उसके पति को एक महीने की ‘ट्रांजिट’ जमानत दी थी, ताकि वह अपने खिलाफ दर्ज अपहरण के मामले में अग्रिम जमानत के लिए मध्यप्रदेश की अदालत का रुख कर सके।

लड़की के पति मोहम्मद फरमान पर उसका अपहरण करने का आरोप है। मध्यप्रदेश पुलिस ने लड़की के पिता की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया था। पिता का दावा है कि उसकी बेटी नाबालिग है।

पिछले साल उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कुंभ मेले में रुद्राक्ष की मालाएं बेच रही इंदौर की इस लड़की का वीडियो एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर अपलोड किया था जिसके बाद वह अपनी मनमोहक मुस्कान और खूबसूरत आंखों के कारण काफी चर्चा में आई थी।

बाद में उसने अपने परिवार के विरोध के बावजूद केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में फरमान से विवाह किया था।

हालांकि, बाद में उसके परिवार ने दावा किया कि वह नाबालिग है। इसके बाद मध्यप्रदेश पुलिस ने फरमान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की विभिन्न धाराओं के तहत अपहरण समेत कई आरोपों के तहत मामला दर्ज किया।

भाषा सिम्मी रंजन

रंजन


लेखक के बारे में