Naxalite Shakuntala Mahto News: सांसद का क़त्ल कर उसकी छाती पर नाचने वाली खूंखार महिला नक्सली शकुंतला ने किया सरेंडर.. महज इतनी उम्र में अपने साथ उठा ले गए थे माओवादी
Naxalite Shakuntala Mahto surrendered in West Bengal: 10 लाख की इनामी नक्सली नेता शकुंतला महतो ने आत्मसमर्पण किया, बचपन में संगठन से जुड़ी थी, साथियों से अपील।
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- 10 लाख की इनामी नक्सली शकुंतला महतो ने किया आत्मसमर्पण।
- महज 10 साल की उम्र में नक्सली संगठन से जुड़ी थी।
- पुराने साथियों से हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौटने की अपील की।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में शामिल रही और 10 लाख रुपये की इनामी महिला नक्सली नेता शाकुंतला महतो उर्फ पुष्पा ने बुधवार को कोलकाता पुलिस मुख्यालय लालबाजार में आत्मसमर्पण कर दिया। (Naxalite Shakuntala Mahto News) वह अपने साथ हथियार और 46 जिंदा कारतूस लेकर पहुंची थी। पुलिस के मुताबिक़ शकुंतला कई बड़े नक्सली अभियानों में शामिल रही है और संगठन की प्रमुख नेताओं में गिनी जाती थी।
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बचपन में ही नक्सली संगठन से जुड़ गई थी
शकुंतला महतो पश्चिम बंगाल के झारग्राम जिले के बेलपहाड़ी थाना क्षेत्र के मेचुआ गांव की रहने वाली है। बताया जाता है कि वह केवल 10 साल की उम्र में नक्सली संगठन के संपर्क में आ गई थी। उस समय वह पांचवीं कक्षा में पढ़ती थी, लेकिन बाद में पढ़ाई छोड़ दी। धीरे-धीरे वह नक्सली संगठन की गतिविधियों में शामिल होती गई और फिर हथियार उठाकर संगठन के लिए काम करने लगी।
कई नामों से पहचान बनाई
नक्सली संगठन में शाकुंतला कई नामों से जानी जाती थी। उसे परी, वर्षा और पुष्पा जैसे नाम दिए गए थे। हालांकि अपने गांव और आसपास के लोगों के बीच वह “लुटुन” नाम से पहचानी जाती थी। (Naxalite Shakuntala Mahto News) पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी। उस दौर में जब पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा की सरकार थी, तब भी सुरक्षा एजेंसियां उसे पकड़ने की कोशिश कर रही थीं।
नक्सली नेता से शादी, कई इलाकों में किया काम
पुलिस से बचाने के लिए शाकुंतला को झारखंड के पारसनाथ पहाड़ इलाके में भेजा गया था। बाद में उसे फिर पश्चिम बंगाल और झारखंड के कई क्षेत्रों में संगठन का काम संभालने की जिम्मेदारी दी गई। वर्ष 2003 में झारग्राम में उसकी मुलाकात नक्सली एरिया कमांडर अतुल महतो से हुई। इसके बाद दोनों ने वर्ष 2005 में झारखंड के तमार जंगल में शादी कर ली। संगठन ने उसे बेलपहाड़ी, दलमा, घाटशिला, बुंडू-तमार, पारसनाथ, सारंडा समेत कई इलाकों में काम करने के लिए भेजा। लालगढ़ आंदोलन के दौरान भी उसने कुख्यात नक्सली नेता किशनजी के साथ काम किया था।
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सरकार की अपील पर छोड़ा हिंसा का रास्ता
सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के बाद नक्सली संगठन कमजोर होता गया। केंद्र सरकार और राज्यों की संयुक्त कार्रवाई में कई नक्सली मारे गए, गिरफ्तार हुए या उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया। इसी अभियान के दौरान शाकुंतला भी झारखंड के सारंडा जंगल से निकलकर सामने आई और अंततः उसने हथियार छोड़ने का फैसला किया। (Naxalite Shakuntala Mahto News) आत्मसमर्पण के बाद शाकुंतला ने अपने पुराने साथियों से भी अपील की। उसने कहा कि जो लोग अभी भी जंगलों में छिपे हुए हैं, उन्हें हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट आना चाहिए। उसने कहा कि सरकार विकास के लिए काम कर रही है और सभी के लिए बेहतर यही है कि वे हथियार छोड़कर सामान्य जीवन अपनाएं।
A significant development in the fight against extremism.
Top Maoist leader Shakuntala Mahato alias Pushpa has surrendered before Kolkata Police, choosing the path of peace over violence and insurgency.
Every surrender is a step towards stability, security, and a stronger… pic.twitter.com/9r1YCtXAUj
— Locket Chatterjee (@me_locket) June 18, 2026
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