कोच्चि, 25 जुलाई (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के दोषी व्यक्ति को उसकी पत्नी के अंतिम संस्कार के 16वें दिन होने वाली रस्म में शामिल होने के लिए पैरोल देने से इनकार करते हुए कहा कि ऐसे ‘‘गंभीर और जघन्य’’ अपराधों के दोषी के प्रति नरमी बरतने से समाज में गलत संदेश जाएगा।
दोषी की बहन ने उसे 10 दिन की आपातकालीन पैरोल देने का अनुरोध करते हुए याचिका दायर की थी जिसे उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि दोषी को उसकी पत्नी के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति देकर पहले ही अधिकतम नरमी बरती जा चुकी है।
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के भाई को जिन अपराधों में दोषी ठहराया गया है, वे गंभीर एवं जघन्य प्रकृति के हैं और ऐसे दोषी को पैरोल दे कर नरमी बरतना पूरी तरह अनुचित है।
अदालत ने कहा कि ऐसे गंभीर अपराधों के दोषी को पैरोल देने से समाज में गलत संदेश जाएगा और यह दंड कानून के उद्देश्य के भी विपरीत होगा।
उसने कहा, ‘‘इसके अलावा दोषी को उसकी पत्नी के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति देकर पहले ही अधिकतम नरमी बरती जा चुकी है।’’
भाषा सिम्मी शोभना
शोभना