कोच्चि, 26 फरवरी (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने शबरिमला स्थित भगवान अय्यप्पा मंदिर में ‘पाडी पूजा’ से संबंधित संदिग्ध अनियमितताओं का संज्ञान लिया और वहां के मुख्य सतर्कता अधिकारी को अनुष्ठान से संबंधित सभी अभिलेखों को अपने कब्जे में लेने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी. और न्यायमूर्ति के. वी. जयकुमार की पीठ ने मुख्य सतर्कता एवं सुरक्षा अधिकारी (पुलिस अधीक्षक) को अभिलेखों को सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
सतर्कता जांच में यह पाया गया कि कुछ ‘पाडी पूजा’ बुकिंग फर्जी या काल्पनिक पते देकर अनधिकृत रूप से अधिक राशि देकर की गई थीं, जिसके बाद अदालत ने यह निर्देश जारी किया।
‘पाडी पूजा’ 18 पवित्र सीढ़ियों ‘पथिनेट्टमपाडी’ की पूजा है, जो कुछ निर्धारित दिनों में ‘पुष्पाभिषेकम’ नामक मूर्ति के पुष्प स्नान के बाद की जाती है।
शाम के समय की जाने वाली यह पूजा तंत्री (प्रधान पुजारी) द्वारा मेलसंथी (पुजारी) की उपस्थिति में संपन्न की जाती है।
अदालत ने कहा कि इस प्रकार की पांच पूजाएं प्रति माह आयोजित की जाती हैं और इस अनुष्ठान में भाग लेना भक्तों के लिए अत्यधिक धार्मिक महत्व रखता है।
उसने कहा कि कार्यकारी अधिकारी ने बताया है कि पाडी पूजा के लिए वर्ष 2045 तक की बुकिंग पहले ही हो चुकी है।
पीठ ने कहा, ‘‘लगभग दो दशक बाद तक की बुकिंग होना इस अनुष्ठान की मांग और एक पारदर्शी तथा कड़ाई से विनियमित प्रणाली की आवश्यकता, दोनों को रेखांकित करता है।’’
फर्जी बुकिंग और अनधिकृत तरीके से पैसों के हस्तांतरण के सतर्कता विभाग के निष्कर्षों को ‘‘चिंताजनक’’ बताते हुए पीठ ने कहा, ‘‘अगर यह सच है, तो ऐसा आचरण निंदनीय है और इसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए।’’
मामले में न्याय मित्र ने अदालत को बताया कि जब सतर्कता अधिकारी ने उचित पहचान सत्यापन पर जोर दिया, तो बुकिंग कराने वाले दो व्यक्ति पाडी पूजा में शामिल होने के लिए उपस्थित नहीं हुए।
पीठ ने कहा, ‘‘हम मुख्य सतर्कता और सुरक्षा अधिकारी (पुलिस अधीक्षक) को निर्देश देते हैं कि वे पाडी पूजा बुकिंग से संबंधित सभी पंजियों और संबंधित अभिलेखों को तत्काल अपने कब्जे में लें तथा सुरक्षित रखें। इन पंजियों और अभिलेखों में वर्ष 2045 तक बुकिंग किस तरीके से की गई है, इसकी जानकारी भी शामिल हो।’’
भाषा यासिर वैभव
वैभव