UN Human Rights Council Meeting/Image Source: @Madhurendra13
UN Human Rights Council Meeting: जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 55वें सत्र के दौरान भारत ने पाकिस्तान के आरोपों का कड़ा और तथ्यात्मक जवाब दिया। भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने ‘राइट टू रिप्लाई’ के तहत पाकिस्तान के कश्मीर संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग था, है और हमेशा रहेगा।
UN Human Rights Council Meeting: अनुपमा सिंह (Anupama Singh India) ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर का विकास बजट उस बेलआउट पैकेज से भी बड़ा है, जिसके लिए पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सामने सहायता मांगता रहा है। उन्होंने कहा कि यह तुलना स्वयं पाकिस्तान की प्राथमिकताओं और वास्तविकताओं को उजागर करती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पाकिस्तान भारत की आधारभूत संरचना परियोजनाओं, जैसे चिनाब ब्रिज, पर सवाल उठाता है तो यह उसकी वास्तविकता से दूरी को दर्शाता है।
🇮🇳 #UNHRC में भारत ने पाकिस्तान पर तीखा प्रहार
करते हुए कहा:
“जम्मू-कश्मीर का विकास बजट पाकिस्तान को मिले पूरे IMF बेलआउट पैकेज से दोगुना से भी अधिक है। पाकिस्तान को यह बात पचाना मुश्किल हो सकता है।”
भारतीय राजनयिक अरुणिमा सिंग ने इस टिप्पणी के जरिए विकास बनाम अस्थिरता की तुलना… pic.twitter.com/Qn2gwUvPA3— Madhurendra kumar मधुरेन्द्र कुमार (@Madhurendra13) February 26, 2026
UN Human Rights Council Meeting: भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान तथ्यों से दूर एक काल्पनिक नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 1947 के भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम के तहत जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय पूर्णतः वैध और अंतिम है। उन्होंने यह भी दोहराया कि यदि कोई मुद्दा शेष है, तो वह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) पर उसका अवैध कब्जा है, जिसे खाली किया जाना चाहिए। भारत ने इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की भूमिका पर भी सवाल उठाए। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि यह संगठन एक सदस्य देश के नैरेटिव को दोहराने वाला मंच बनता जा रहा है, जो निष्पक्षता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है।