Lunar Eclipse 2026: 100 साल बाद बन रहा ये अद्भुत संयोग! जानें चंद्र ग्रहण और सूतक काल के बीच होलिका दहन का सटीक मुहूर्त

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Lunar Eclipse 2026: इस साल होली पर एक दुर्लभ संयोग बन रहा है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा, वही दिन होलिका दहन का भी होता है। इस वजह से ग्रहण के सूतक काल के बीच होलिका दहन विशेष विधि से किया जाएगा।

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  • Publish Date - February 26, 2026 / 01:18 PM IST,
    Updated On - February 26, 2026 / 01:45 PM IST

(Lunar Eclipse 2026/ Image Credit: IBC24 News Customize)

HIGHLIGHTS
  • साल 2026 की होली पर 100 साल बाद दुर्लभ खगोलीय संयोग बन रहा है।
  • फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर साल का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा।
  • ग्रहण के समय सुबह 6:20 बजे से सूतक काल प्रभावी रहेगा।

Lunar Eclipse 2026: साल 2026 की होली पर 100 साल बाद एक बहुत ही दुर्लभ खगोलीय संयोग बन रहा है। इस साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर पहला चंद्र ग्रहण लगेगा। चंद्र ग्रहण और भद्र का साया होली और होलिका दहन के समय भी रहेगा, इसलिए यह पर्व इस बार और भी खास बन गया है।

चंद्र ग्रहण और सूतक काल

ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण के 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू होगा। सूतक काल में पूजा, धार्मिक अनुष्ठान और मंदिरों में गतिविधियां नहीं की जाती हैं। इस बार चंद्र ग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे से शुरू होगा और शाम 6:47 बजे तक रहेगा। इसका सूतक काल सुबह 6:20 बजे से प्रभावी होगा।

होलिका दहन का समय

होली से एक दिन पहले यानी फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाता है। इस साल होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 3 मार्च को शाम 6:48 बजे से रात 8:50 बजे तक है। कुछ पंचांगों में इसे 2 मार्च को शाम 5:56 बजे से प्रदोष काल में बताया गया है, लेकिन उस समय भद्रा का साया रहेगा।

भद्रा और पूजा का महत्व

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, होलिका दहन भद्रा या सूतक काल में नहीं किया जाता। महिलाएं बच्चों की लंबी उम्र और परिवार की समृद्धि के लिए पूजा करती हैं। इस साल 3 मार्च को ग्रहण का सूतक समाप्त होने के बाद होलिका दहन करना उचित माना जा रहा है, भले ही पूर्णिमा तिथि समाप्त हो चुकी हो।

होली और पूजन का तरीका

महिलाओं को होली का पूजन 2 मार्च को करना चाहिए, क्योंकि अगले दिन सुबह 6:20 बजे से ग्रहण का सूतक शुरू हो जाएगा। इस तरह 3 मार्च को होलिका दहन सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है। दोनों दिन ध्यान से मुहूर्त देखकर पूजा और दहन करने से किसी भी दोष का असर नहीं पड़ेगा।

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इस साल होली पर कौन सा दुर्लभ संयोग बन रहा है?

साल 2026 की होली पर 100 साल बाद फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण और भद्रा का साया रहेगा।

सूतक काल कब शुरू होगा और क्या होता है?

चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल सुबह 6:20 बजे से शुरू होगा। इस समय पूजा और धार्मिक अनुष्ठान नहीं किए जाते।

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त क्या है?

इस साल होलिका दहन 3 मार्च को शाम 6:48 बजे से रात 8:50 बजे तक किया जाएगा।

भद्रा का प्रभाव क्या है और इसका पूजा पर असर?

भद्रा का साया 2 मार्च को रहेगा। ज्योतिष अनुसार, भद्रा के समय होलिका दहन और रक्षाबंधन पर ध्यान दिया जाता है।