केरल भूस्खलन में जान गंवाने वाले इंजीनियर का पैतृक गांव में हुआ अंतिम संस्कार

केरल भूस्खलन में जान गंवाने वाले इंजीनियर का पैतृक गांव में हुआ अंतिम संस्कार

केरल भूस्खलन में जान गंवाने वाले इंजीनियर का पैतृक गांव में हुआ अंतिम संस्कार
Modified Date: July 13, 2026 / 08:00 pm IST
Published Date: July 13, 2026 8:00 pm IST

शिमला/नूरपुर, 13 जुलाई (भाषा) केरल में सात जुलाई को भूस्खलन में जान गंवाने वाले 50 वर्षीय इंजीनियर का सोमवार को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा ज़िले में उनके पैतृक गांव टकोली घिरथा में अंतिम संस्कार किया गया।

वायनाड में भूस्खलन वाली जगह से विक्रम राणा का शव मिलने के एक दिन बाद रविवार को उनके पार्थिव शरीर को उनके गांव लाया गया।

इंजीनियर विक्रम ने आखिरी बार सात जुलाई को अपने परिवार वालों से पूर्वाह्न करीब 11 बजे बात की थी। यह बातचीत कल्लाडी में मीनाक्षी पुल के पास सुरंग के निर्माण के दौरान भूस्खलन होने से कुछ ही पल पहले हुई थी।

परिवार के सदस्य आठ जुलाई को वायनाड पहुंचे और तलाशी अभियान के दौरान वे वहीं रहे।

तलाशी अभियान के दौरान उनका शव मिला। इस अभियान में करीब एक हजार स्वयंसेवकों एवं एक श्वान दस्ते ने हिस्सा लिया।

शव गांव लाये जाने पर बड़ी संख्या में ग्रामीण विक्रम को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हुए।

विक्रम के भाई प्रमोद ने बताया कि केरल सरकार और उसके मंत्रियों ने तलाश अभियान के दौरान पूरा सहयोग दिया।

उन्होंने कहा कि वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी ने भी परिवार को हर संभव मदद दी, जिसके लिए वे बहुत आभारी हैं।

पूर्व वन मंत्री और भाजपा नेता राकेश पठानिया भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए।

पठानिया ने संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि विक्रम की मौत किसी शहादत से कम नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से ऐसी दुखद घटनाओं में जान गंवाने वालों को शहीद का दर्जा देने की अपील की।

फतेहपुर के अनुमंडल अधिकारी (एसडीएम) रमन शर्मा ने आश्वासन दिया कि पीड़ित परिवार को हरसंभव मदद दिलाने के लिए सरकार को जरूरी प्रस्ताव भेजा जाएगा। राणा के परिवार में उनकी पत्नी, बेटा और बेटी हैं।

भाषा

राजकुमार अविनाश

अविनाश

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