श्रम संहिताएं दशकों में किए गए सबसे महत्वपूर्ण श्रम सुधारों में शामिल : विधि आयोग की सदस्य सचिव

श्रम संहिताएं दशकों में किए गए सबसे महत्वपूर्ण श्रम सुधारों में शामिल : विधि आयोग की सदस्य सचिव

श्रम संहिताएं दशकों में किए गए सबसे महत्वपूर्ण श्रम सुधारों में शामिल : विधि आयोग की सदस्य सचिव
Modified Date: February 22, 2026 / 05:49 pm IST
Published Date: February 22, 2026 5:49 pm IST

नयी दिल्ली, 22 फरवरी (भाषा) विपक्षी दलों की आलोचना के बीच, विधि आयोग के एक शीर्ष अधिकारी ने रविवार को चार श्रम संहिताओं को एक ऐसे सुधार के रूप में वर्णित किया, जो देश में अधिक ‘‘समावेशी और भविष्य की जरूरतों के अनुसार श्रम बाजार’’ बनाने की क्षमता प्रदान करता है।

अधिकारी ने कहा कि ये संहिताएं ‘‘दशकों में किए गए सबसे महत्वपूर्ण और दूरगामी श्रम सुधारों’’ में शुमार हैं।

उन्होंने कहा कि वर्षों में, भारत के श्रम विनियमन में क्रमिक रूप से विकास हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप विभिन्न परिभाषाओं, भिन्न सीमाओं और भिन्न अनुपालन दायित्वों वाले कई कानून बने हैं।

विधि आयोग की सदस्य सचिव अंजू राठी राणा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘इन चार श्रम संहिता की रूपरेखा मजदूरी, सुरक्षा मानकों और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित अवधारणाओं को एक साथ लाकर जटिलताओं को दूर करने का प्रयास करती है, साथ ही विनियमन को ऐसे श्रम बाजार के अनुरूप बनाता है, जो अब पारंपरिक रोजगार संबंधों तक सीमित नहीं है।’’

विपक्षी दलों और 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने चार नए श्रम कानूनों का विरोध किया है और उन्हें ‘‘श्रमिक विरोधी’’ और ‘‘कॉरपोरेट समर्थक’’ बताया है।

पूर्व केंद्रीय कानून सचिव ने कहा, ‘‘मेरे विचार में, ये श्रम संहिताएं दशकों में किए गए सबसे महत्वपूर्ण और दूरगामी श्रम सुधारों में से हैं। ये चार एकीकृत संहिताएं देश के श्रम कानून ढांचे में एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव का प्रतीक हैं।’’

भाषा

शफीक दिलीप

दिलीप


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