लद्दाख: विकास कार्यों में तेजी के लिए भूमि उपयोग मंजूरी की शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया गया

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लद्दाख: विकास कार्यों में तेजी के लिए भूमि उपयोग मंजूरी की शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया गया

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  • Publish Date - August 2, 2026 / 05:08 PM IST,
    Updated On - August 2, 2026 / 05:08 PM IST

लेह, दो अगस्त (भाषा) लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने निर्णय प्रक्रिया के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए नगर समितियों के बाहर विकास परियोजनाओं के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन संबंधी प्रस्तावों को मंजूरी देने का अधिकार मुख्य सचिव और मंडलायुक्त को सौंप दिया है।

एक आधिकारिक प्रवक्ता ने रविवार को बताया कि ‘‘यह कदम केंद्र शासित प्रदेश में नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे जनहितकारी विनियमन-सरलीकरण अभियान का हिस्सा है।’’

उपराज्यपाल ने आठ जुलाई को दो कनाल तक की भूमि पर आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक और मिश्रित उपयोग के विकास कार्यों के लिए पूर्व अनुमति की अनिवार्यता समाप्त कर दी थी।

प्रवक्ता ने बताया कि अब उन्होंने अधिकारों का और विकेंद्रीकरण करते हुए दो कनाल से अधिक और चार कनाल तक के भूखंडों के भूमि उपयोग परिवर्तन प्रस्तावों को मंजूरी देने का अधिकार मंडलायुक्त को सौंप दिया है।

उन्होंने बताया कि चार कनाल से अधिक और दो एकड़ तक की भूमि के भूमि उपयोग परिवर्तन प्रस्तावों को मंजूरी देने का अधिकार मुख्य सचिव को दिया गया है, जबकि दो एकड़ से अधिक भूमि के उपयोग परिवर्तन की मंजूरी पहले की तरह उपराज्यपाल ही देंगे।

प्रवक्ता ने कहा कि इससे पहले ऐसे सभी मामलों में अंतिम निर्णय का अधिकार केवल उपराज्यपाल के पास था। उन्होंने कहा कि इस नियामकीय ढांचे के विकेंद्रीकरण से भूमि विकास संबंधी आवेदनों का तेजी से निपटारा हो सकेगा।

भाषा अमित धीरज

धीरज