सदियों से धर्म की जीवंत भूमि रहा है लद्दाख : शाह

सदियों से धर्म की जीवंत भूमि रहा है लद्दाख : शाह

सदियों से धर्म की जीवंत भूमि रहा है लद्दाख : शाह
Modified Date: May 1, 2026 / 01:21 pm IST
Published Date: May 1, 2026 1:21 pm IST

लेह/जम्मू, एक मई (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की 75 साल बाद लद्दाख वापसी को ‘‘ऐतिहासिक पुनर्मिलन’’ बताते हुए कहा कि केंद्रशासित प्रदेश सदियों से ‘‘धर्म की जीवंत भूमि’’ रहा है जिसने बौद्ध ज्ञान को सहेजा एवं पोषित किया है।

शाह ने आधुनिक समय में बुद्ध की शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि शांति, करुणा एवं मध्यम मार्ग का संदेश 2,500 साल पहले की तुलना में आज कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

लद्दाख के दो दिवसीय दौरे पर आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लेह में तथागत बुद्ध के पवित्र अवशेषों को दर्शनार्थ रखे जाने के कार्यक्रम और 2569वें बुद्ध पूर्णिमा समारोह का उद्घाटन किया।

शाह ने उद्घाटन के बाद कहा, ‘‘लद्दाख सदियों से धर्म की जीवंत भूमि रहा है। जब दलाई लामा यहां आते हैं, तो वह कहते हैं कि यह भूमि केवल भौगोलिक जमीन नहीं, बल्कि बौद्ध संस्कृति एवं करुणा की जीवंत प्रयोगशाला है।’’

उन्होंने लद्दाख को करुणा की भूमि बताते हुए कहा कि इस भूमि ने ज्ञान को सहेजा और पोषित किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘जब भी बौद्ध धर्म संकट में पड़ा, इस भूमि ने बुद्ध की शिक्षाओं की रक्षा के लिए काम किया और जब शांति लौटी, तो इसने उस संरक्षित ज्ञान को विस्तार देने और आगे बढ़ाने में मदद की।’’

शाह ने कहा, ‘‘जब तक व्यक्ति ज्ञान को आत्मसात कर उसे अपने जीवन का हिस्सा नहीं बनाता, तब तक मुक्ति संभव नहीं है। आध्यात्मिक साधना के बिना ज्ञान अधूरा है, जबकि ज्ञान के बिना आध्यात्मिक साधना दिशाहीन है। इसलिए आध्यात्मिक साधना और ज्ञान का संगम ही सही मार्ग है। इन सबके बाद भी यदि नैतिक अनुशासन नहीं है, तो व्यक्ति वास्तव में ज्ञानपूर्ण जीवन नहीं जी सकता। ज्ञानमय जीवन का आधार नैतिक अनुशासन है।’’

शाह ने कहा कि भारत में उत्पन्न तथागत बुद्ध की शिक्षाएं लद्दाख और इसके आसपास के मार्गों के जरिए चीन तथा कई अन्य देशों तक पहुंचीं।

उन्होंने कहा, ‘‘लद्दाख की धरती से निकला संदेश दुनिया भर के अनेक लोगों के लिए जीवन को आगे बढ़ाने की प्रेरक शक्ति बना है। लद्दाख में इन पवित्र अवशेषों की उपस्थिति हमें याद दिलाती है कि भारत की सभ्यता हजारों वर्षों से शांति और सह-अस्तित्व का संदेश देती रही है।’’

उन्होंने कहा कि लद्दाख और कारगिल जैसे विविधतापूर्ण क्षेत्र में यह संदेश और अधिक प्रासंगिक हो जाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह विरासत आज भी हमें बताती है कि संघर्ष और अशांति के बीच केवल शांति और करुणा का मार्ग ही समाधान दे सकता है।’’

शाह ने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा पर इन अवशेषों की वापसी ने लद्दाख के लोगों के लिए इस पर्व के महत्व को और बढ़ा दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘ये पवित्र अवशेष 75 साल बाद लद्दाख आए हैं। ऐसा लगता है कि मानो आज स्वयं बुद्ध यहां उपस्थित हैं।’’

उन्होंने कहा कि लद्दाख और कारगिल में बौद्ध धर्म के अनुयायी तथा अन्य धर्मों के लोग इन अवशेषों से आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करेंगे।

शाह ने बौद्ध धर्म के प्रसार में लद्दाख की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि कश्मीर कभी बौद्ध अध्ययन, महायान दर्शन और बौद्ध कला का प्राचीन केंद्र था, जहां से लद्दाख पहली बार बौद्ध धर्म के निकट संपर्क में आया था।

उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक के दूतों ने कश्मीर और गांधार के जरिए लद्दाख में बौद्ध प्रभाव की नींव रखी तथा पहली से तीसरी शताब्दी ईस्वी के बीच कुषाण काल में इस क्षेत्र में महायान बौद्ध धर्म का विस्तार हुआ।

शाह ने कहा कि कश्मीर, लेह, यारकंद, खोतान और तिब्बत को जोड़ने वाला रेशम मार्ग न केवल व्यापार, बल्कि विचारों, भिक्षुओं, पांडुलिपियों और कलात्मक परंपराओं का भी माध्यम बना।

उन्होंने कहा कि बाद में सातवीं से दसवीं शताब्दी के बीच तिब्बती प्रभाव ने महायान और वज्रयान परंपराओं के जरिए लद्दाख को और समृद्ध किया।

शाह ने आधुनिक समय में बुद्ध की शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि शांति, करुणा और मध्यम मार्ग का संदेश आज 2,500 साल पहले की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा, ‘‘संघर्ष और अशांति के बीच केवल शांति और करुणा का मार्ग ही समाधान दे सकता है।’’

शाह ने लद्दाख प्रशासन से यह सुनिश्चित करने की अपील भी की कि सभी धर्मों के अनुयायी, विशेषकर बौद्ध धर्मावलंबी, पवित्र अवशेषों के दर्शन कर सकें।

इससे पहले, उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ के जरिए समस्त देशवासियों को बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कहा, ‘‘भगवान बुद्ध का जीवन हमें सत्य, अहिंसा और करुणा के पथ पर चलते हुए मानवता के कल्याण हेतु निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उनका अमूल्य ज्ञान युगों-युगों तक मानव सभ्यता को आलोकित करता रहेगा।’’

भाषा

सिम्मी मनीषा

मनीषा


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