जमीन के बदले नौकरी मामले में अब कानून की गिरफ्त में लालू: भाजपा

जमीन के बदले नौकरी मामले में अब कानून की गिरफ्त में लालू: भाजपा

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  • Publish Date - January 9, 2026 / 06:51 PM IST,
    Updated On - January 9, 2026 / 06:51 PM IST

नयी दिल्ली, नौ जनवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत द्वारा जमीन के बदले नौकरी घोटाले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश जारी किये जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख पर निशाना साधते हुए कहा कि विभिन्न घोटालों में संलिप्तता के लिए वह (लालू) अब कानून की गिरफ्त में हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता रवि शंकर प्रसाद ने यहां पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि अदालतों ने लालू को करोड़ों रूपये के चारा घोटाले से जुड़े विभिन्न मामलों में कुल 32.5 साल की कैद की सजा सुनाई है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, “बिटुमेन’ घोटाला, जमीन के बदले नौकरी घोटाला, आप (लालू) और कितने घोटाले करेंगे? लालू बाबू, आपको कहीं तो रुकना चाहिए था।”

पटना साहिब से लोकसभा सदस्य प्रसाद ने कहा, “एक कहावत है कि कानून आपको पकड़ ही लेगा। ठीक यही अब हो रहा है।”

इससे पहले दिन में, दिल्ली की एक अदालत ने कथित जमीन के बदले नौकरी घोटाले में राजद प्रमुख, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था।

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि यादव ने आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए रेलवे मंत्रालय को अपनी निजी जागीर बना लिया था।

अदालत ने कहा कि यादव परिवार ने रेलवे अधिकारियों और अपने करीबी सहयोगियों की मिलीभगत से जमीन हासिल करने के लिए सरकारी नौकरी का इस्तेमाल सौदेबाजी के हथियार के रूप में किया।

न्यायाधीश ने आदेश के मुख्य भाग को सुनाते हुए कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की अंतिम रिपोर्ट में एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है।

अदालत ने यादव और उनके परिवार के सदस्यों सहित आरोपियों की मामले में बरी किये जाने की याचिका को ‘अनुचित’ बताते हुए खारिज कर दिया।

न्यायाधीश ने रेखांकित किया कि पूर्व रेल मंत्री और अन्य लोग जमीन हड़पने के लिए एक आपराधिक गिरोह के रूप में काम कर रहे थे।

आदेश में रेल अधिकारियों द्वारा ‘दुरुपयोग’ पर भी प्रकाश डाला गया।

अदालत ने कहा, “आरोपपत्र का विवरण वर्णित अपराध का मूल तत्व है।”

अदालत ने इस मामले में 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए हैं और रेल अधिकारियों व उनके स्थान पर नियुक्त अधिकारियों सहित 52 अन्य लोगों को बरी कर दिया।

भाषा जितेंद्र नरेश

नरेश