पेंच की ‘लंगड़ी’ बाघिन की वृद्धावस्था के चलते मृत्यु

पेंच की ‘लंगड़ी’ बाघिन की वृद्धावस्था के चलते मृत्यु

पेंच की ‘लंगड़ी’ बाघिन की वृद्धावस्था के चलते मृत्यु
Modified Date: March 8, 2026 / 12:40 am IST
Published Date: March 8, 2026 12:40 am IST

सिवनी, सात मार्च (भाषा) मध्यप्रदेश के पेंच बाघ अभयारण्य की सबसे उम्रदराज बाघिनों में शामिल ‘लंगड़ी’ की शनिवार को वृद्धावस्था के चलते मृत्यु हो गई। वन अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

पेंच बाघ अभयारण्य के उपनिदेशक पुनीत गोयल ने बताया कि वर्ष 2008 में जन्मी इस बाघिन की पहचान पीएन-20 (टी-20) के रूप में की गई थी और उसकी उम्र लगभग 18 वर्ष थी। उन्होंने बताया कि वह अभयारण्य की सबसे उम्रदराज बाघिनों में से एक थी।

उन्होंने बताया, “बाघिन शनिवार सुबह करीब साढ़े दस बजे अभयारण्य के करमाझिरी कोर क्षेत्र में मृत पाई गई। उसके एक अगले पंजे में जन्मजात विकृति थी, जिसके कारण वह हल्की लंगड़कर चलती थी और इसी वजह से पर्यटकों के बीच ‘लंगड़ी’ के नाम से लोकप्रिय थी।”

गोयल ने बताया कि ‘लंगड़ी’ पेंच की मशहूर ‘कॉलरवाली’ बाघिन की बहन थी और करमाझिरी रेंज में उसकी अच्छी मौजूदगी रहती थी।

वन अधिकारियों के अनुसार, इस बाघिन ने अपने जीवनकाल में 10 शावकों को जन्म दिया, जिससे अभयारण्य और आसपास के क्षेत्रों में बाघों की संख्या बढ़ाने में मदद मिली। उन्होंने बताया कि वृद्धावस्था के कारण वह हाल के महीनों में शारीरिक रूप से कमजोर हो गई थी और अपने दम पर शिकार करने में असमर्थ हो गई थी।

अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के दिशा-निर्देशों के अनुसार पशु चिकित्सकों की टीम ने बाघिन के शव का पोस्टमार्टम किया।

भाषा सं दिमो अमित

अमित


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