जमीन हड़पने का मामला : न्यायालय ने अभिषेक बनर्जी के पीए से पूछताछ का ब्योरा मांगा
जमीन हड़पने का मामला : न्यायालय ने अभिषेक बनर्जी के पीए से पूछताछ का ब्योरा मांगा
नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार से कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय की पूछताछ से जुड़े रिकॉर्ड पेश करे।
रॉय ने आरोप लगाया था कि जांच करने वालों ने जमीन हड़पने के कथित मामले में उनसे बहुत कम पूछताछ की थी।
इसके अलावा, शीर्ष अदालत ने रॉय को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा अगली सुनवाई (सात सितंबर) तक के लिए बढ़ा दी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ रॉय की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कलकत्ता उच्च न्यायालय के छह अगस्त के आदेश को चुनौती दी गई थी।
उच्च न्यायालय ने साल्बोनी भूमि कब्जाने के मामले में रॉय को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद, छह अगस्त को ही शीर्ष अदालत ने इस मामले में रॉय की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान, रॉय की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि पूरी पूछताछ की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई थी और उनके मुवक्किल ने पूछे गए सभी सवालों के जवाब दिए थे।
शंकरनारायण ने पहले दी गई इस जानकारी में सुधार किया कि रॉय ने चुप रहने के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा कि पीठ के समक्ष दाखिल एक अतिरिक्त हलफनामे से पता चलता है कि रॉय ने खुद के खिलाफ गवाही न देने के अधिकार का इस्तेमाल नहीं किया था और जांच में पूरा सहयोग किया था।
हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि जांच करने वालों ने रॉय से उस अपराध के बारे में कम सवाल पूछे, जिसकी जांच हो रही थी, जबकि उनके परिवार तथा तृणमूल कांग्रेस के कामकाज, भर्ती और फंडिंग के बारे में अधिक सवाल पूछे गये।
उन्होंने कहा, ‘‘पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई है।’’ उन्होंने यह भी बताया कि रॉय से रोजाना आठ से नौ घंटे तक पूछताछ की जाती थी और अलग-अलग प्राथमिकी के सिलसिले में उन्हें बारी-बारी से बुलाया जाता था।
शंकरनारायणन ने रॉय पर लगे आरोपों का ज़िक्र करते हुए कहा, ‘‘मुझ (रॉय) पर 10 लाख रुपये के एक लेन-देन का आरोप है।’’
उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसी इस मामले को सरकारी या खास मकसद वाली जमीन को निजी जमीन में बदलने से जुड़े एक बड़े कथित घोटाले का हिस्सा मान रही है।
उन्होंने पीठ को बताया कि 11 दिनों तक पूछताछ के बावजूद, रॉय से उस खास लेन-देन के बारे में एक भी सवाल नहीं पूछा गया जो कथित तौर पर उन्हें इस अपराध से जोड़ता है।
हालांकि, प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यह मामला सिर्फ़ 10 लाख रुपये के कथित लेन-देन तक सीमित नहीं था, बल्कि जांच जमीन के एक बड़े घोटाले से जुड़े आरोपों के बारे में थी, जिसमें भारी रकम का लेन-देन शामिल था।
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस बात का खंडन किया कि रॉय से जरूरी मुद्दों पर पूछताछ नहीं की गई थी।
पूछताछ से जुड़ी जानकारी का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि रॉय से पूछा गया था कि क्या उन्होंने अपने निजी बैंक खाते में नकद जमा किया था।
मेहता ने यह भी कहा कि जांचकर्ताओं को बाद में और भी जमा राशि मिली तथा उन्हें शक है कि बैंक खातों में दिख रही रकम कथित तौर पर हासिल हुई कुल रकम का सिर्फ़ एक छोटा सा हिस्सा हो सकती है।
इसके बाद पीठ ने यह जानना चाहा कि क्या जांचकर्ताओं ने रॉय से खासतौर पर उन नकद जमा और लेन-देन के स्रोत के बारे में पूछताछ की थी, जिनमें कथित तौर पर 60 लाख रुपये, 20 लाख रुपये और 40 लाख रुपये की रकम शामिल थी और कुल रकम करोड़ों में थी।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने पूछा, ‘‘क्या आप हमें (रॉय की) पूछताछ और जवाब की प्रतिलिपि… ऑडियो और वीडियो रिकॉर्ड दे सकते हैं?’’
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि पूछताछ से जुड़ी जो भी जानकारी उपलब्ध होगी, उसे अदालत के साथ साझा किया जाएगा। उन्होंने पीठ को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार कोई भी जानकारी नहीं छिपाएगी।
सुनवाई के दौरान एक राजनीतिक पार्टी के खाते से एक कंपनी को कथित तौर पर लगभग 30 करोड़ रुपये अंतरित करने का भी ज़िक्र हुआ। राज्य सरकार के अनुसार, इस कंपनी की अभी दूसरे मामलों में भी जांच चल रही है।
न्यायमूर्ति बागची ने उस कंपनी से जुड़े मामलों में केंद्रीय एजेंसियों की जांच के तरीके और रफ़्तार पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के कई न्यायाधीशों ने पहले भी कुछ जांच की प्रगति पर असंतोष जताया था।
मेहता ने कहा कि दूसरी जांच एजेंसियों के काम-काज की वजह से राज्य पुलिस को उन लेन-देन की जांच करने से नहीं रोका जाना चाहिए, जो उसकी अपनी जांच के लिए जरूरी लग रहे थे।
शंकरनारायणन ने जोर देकर कहा कि पूछताछ की वीडियोग्राफी से यह साफ़ पता चल जाएगा कि क्या हुआ था और इससे न्यायालय स्वतंत्र रूप से यह तय कर पाएगा कि क्या रॉय से उन आरोपों के बारे में पूछताछ की गई थी जो उनपर लगे हैं।
पीठ ने कहा कि वह पूछताछ के रिकॉर्ड देखना चाहती है। इसके साथ ही इसने मामले की अगली सुनवाई के लिए अगले सोमवार की तारीख तय की।
इससे पहले, शीर्ष अदालत ने जमीन हड़पने के मामले में छह अगस्त को रॉय की गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी थी।
भाषा
सुरेश नरेश
नरेश

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