भूमि अधिग्रहण मुआवज़े के खिलाफ अपील पर समय-सीमा कानून की रोक नहीं : न्यायालय

भूमि अधिग्रहण मुआवज़े के खिलाफ अपील पर समय-सीमा कानून की रोक नहीं : न्यायालय

भूमि अधिग्रहण मुआवज़े के खिलाफ अपील पर समय-सीमा कानून की रोक नहीं : न्यायालय
Modified Date: February 9, 2026 / 10:06 pm IST
Published Date: February 9, 2026 10:06 pm IST

नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि भूमि अधिग्रहण के लिए दिए गए मुआवजे के खिलाफ दायर अपीलें परिसीमा अधिनियम के तहत वर्जित नहीं हैं, और उच्च न्यायालय ऐसी याचिकाएं दायर करने में हुई देरी को अनदेखा कर सकता है।

न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एस.सी. शर्मा की पीठ ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 की धारा 74 को धारा 103 के साथ पढ़ने और परिसीमा अधिनियम, 1963 के प्रावधानों के बीच परस्पर संबंध का निर्णय करते हुए इस पेचीदा कानूनी प्रश्न का उत्तर दिया।

पीठ ने यह फैसला दिया कि जिन भूमि अधिग्रहण मामलों की शुरुआत पुराने 1894 के कानून के तहत हुई थी, लेकिन एक जनवरी 2014 को नया कानून लागू होने से पहले जिनमें मुआवज़े का कोई निर्णय नहीं हुआ था, उन मामलों में मुआवज़ा 2013 के नये कानून के अनुसार तय किया जाएगा।

पीठ ने कहा, “वर्ष 2013 के अधिनियम की धारा 24(1)(ए) उन सभी मामलों पर लागू होती है, जिनमें ये अधिनियम लागू होने के बाद निर्णय पारित किए गए हों।”

न्यायालय ने कहा कि 2013 के अधिनियम की धारा 24(1)(ए) में यह प्रावधान है कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के अंतर्गत आरंभ की गई वैसी भूमि अधिग्रहण कार्यवाही के लिए मुआवजे के निर्धारण से संबंधित 2013 अधिनियम के सभी प्रावधान लागू होंगे, जहां उक्त भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 11 के अंतर्गत कोई मुआवजा नहीं दिया गया है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि धारा 24(1)(ए) के तहत मुआवजा पारित करने के लिए, पुनर्वास और पुनर्स्थापन पात्रता को छोड़कर, केवल 2013 अधिनियम के प्रावधानों का पालन करना होगा।

इसमें कहा गया है कि पीड़ित पक्ष 2013 के अधिनियम के तहत स्थापित भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन प्राधिकरण द्वारा पारित फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालयों में अपील दायर कर सकते हैं, जिसे पहली अपील और 2013 अधिनियम की धारा 74 के तहत अपील के रूप में माना जाएगा।

न्यायालय ने फैसला सुनाया, “वर्ष 2013 के अधिनियम की धारा 74, 1963 (परिसीमा) अधिनियम की धारा-पांच के लागू होने पर रोक नहीं लगाती है।”

पीठ ने निर्देश दिया गया कि 2013 के अधिनियम की धारा 74 के तहत उच्च न्यायालयों के समक्ष प्रथम अपील दाखिल करने में देरी की माफी मांगने वाले सभी आवेदन स्वीकार किए जाते हैं।

पीठ ने कहा कि 2013 अधिनियम की धारा 74 प्राधिकरण द्वारा पारित मुआवजे के खिलाफ अपील करने का वैधानिक अधिकार प्रदान करती है और इस तरह के अपीलीय उपाय का अस्तित्व इस बात को पुष्ट करता है कि प्राधिकरण के समक्ष कार्यवाही मूल प्रकृति की है और इसके द्वारा पारित मुआवजा एक निर्णय और एक डिक्री है।

भाषा प्रशांत सुरेश

सुरेश


लेखक के बारे में