वकीलों ने प्रधान न्यायाधीश से पर्यावरण कार्यकर्ताओं के खिलाफ टिप्पणियां वापस लेने का अनुरोध किया

वकीलों ने प्रधान न्यायाधीश से पर्यावरण कार्यकर्ताओं के खिलाफ टिप्पणियां वापस लेने का अनुरोध किया

वकीलों ने प्रधान न्यायाधीश से पर्यावरण कार्यकर्ताओं के खिलाफ टिप्पणियां वापस लेने का अनुरोध किया
Modified Date: May 21, 2026 / 03:58 pm IST
Published Date: May 21, 2026 3:58 pm IST

नयी दिल्ली, 21 मई (भाषा) देश के 72 वकीलों, विधि छात्रों, विधि शिक्षकों और कानून की शिक्षा प्राप्त करने वाले कार्यकर्ताओं के एक समूह ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत को एक खुला पत्र लिखकर विकास परियोजनाओं को रोकने के लिए याचिका दायर करने के तरीके पर उच्चतम न्यायालय की हालिया टिप्पणियों को वापस लेने की मांग की है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने 11 मई को कहा था, “हमें इस देश में एक भी ऐसी परियोजना दिखाएं, जहां इन तथाकथित पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कहा हो कि हम इस परियोजना का स्वागत करते हैं।”

मंगलवार को जारी पत्र में कहा गया है कि ये टिप्पणियां कानून, वैधानिक संस्थाओं और उच्चतम न्यायालय द्वारा दशकों में बनाए गए न्यायशास्त्र के दायरे में पारिस्थितिकी की रक्षा करने वाले संबंधित नागरिकों, समुदायों और समूहों पर गलत आक्षेप वाली हैं।

पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में नेशनल अलायंस फॉर जस्टिस, अकाउंटेबिलिटी एंड राइट्स (एनएजेएआर) के सदस्य हैं, जो विधि पेशेवरों का एक मंच है।

पत्र के अनुसार, ‘‘हम इसलिए लिख रहे हैं क्योंकि कही गईं बातें एक मामले के नतीजे से कहीं आगे की हैं। यह एक बड़े कानूनी बदलाव से जुड़ा है: पर्यावरण संबंधी याचिका को संवैधानिक शासन का एक अविभाज्य हिस्सा मानने से लेकर इसे रुकावट के संदिग्ध रूप में देखने तक।’’

इसमें यह भी कहा गया कि ये बातें नागरिकों को वैधानिक जिम्मेदारियों को लागू करने वाला मानने से लेकर उन्हें ‘तथाकथित पर्यावरण कार्यकर्ता’ कहकर खारिज करने तक के बदलाव से जुड़ी हैं।

भाषा वैभव नरेश

नरेश


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