एलडीएफ के रुख में नहीं आया है बदलाव, उसे धार्मिक कट्टरपंथियों के वोट नहीं चाहिए: भाकपा नेता विश्वम

एलडीएफ के रुख में नहीं आया है बदलाव, उसे धार्मिक कट्टरपंथियों के वोट नहीं चाहिए: भाकपा नेता विश्वम

एलडीएफ के रुख में नहीं आया है बदलाव, उसे धार्मिक कट्टरपंथियों के वोट नहीं चाहिए: भाकपा नेता विश्वम
Modified Date: April 5, 2026 / 04:04 pm IST
Published Date: April 5, 2026 4:04 pm IST

तिरुवनंतपुरम, पांच अप्रैल (भाषा) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की केरल इकाई के सचिव बिनॉय विश्वम ने रविवार को कहा कि सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) का यह रुख रहा है कि वह धार्मिक कट्टरपंथियों के वोट नहीं चाहती है।

जब विश्वम से पूछा गया कि क्या प्रतिबंधित ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ की राजनीतिक शाखा ‘सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई)’ से समर्थन लेने के संबंध में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा के रूख में कोई बदलाव आया है, तो उन्होंने कहा कि मोर्चा के वैचारिक रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।

उन्होंने एक टेलीविजन चैनल से कहा, ‘‘वैचारिक रूप से हमारे रूख में कोई बदलाव नहीं आया है। हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। हमें धर्मोन्मादियों के वोट नहीं चाहिए, लेकिन हम सभी मनुष्यों के वोट स्वीकार करेंगे।’’

उनकी यह टिप्पणी एसडीपीआई द्वारा नेमोम समेत कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में एलडीएफ को दिए गए समर्थन को लेकर उठे राजनीतिक विवाद के बीच आई है। इन निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा को एक मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।

विश्वम ने धर्म और धार्मिक कट्टरपंथ के बीच अंतर स्पष्ट करने का प्रयास किया और कहा कि धार्मिक आस्था एवं कट्टरपंथ मौलिक रूप से भिन्न हैं। बार-बार पूछे जाने पर भी उन्होंने स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि क्या एलडीएफ केरल में नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में एसडीपीआई से वोट स्वीकार करेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि एसडीपीआई नेतृत्व ने हाल में संकेत दिया है कि वह भाजपा को लाभ पहुंचाने वाला कोई भी कदम नहीं उठाएगा।

विश्वम ने कहा, ‘‘जब वे ऐसा कहते हैं, तो हम जाकर उससे भाजपा की मदद करने के लिए नहीं कह सकते।’’

उन्होंने इस बात का सीधा जवाब नहीं दिया कि क्या वामदल इस संगठन का समर्थन स्वीकार करेंगे।

भाकपा नेता की यह टिप्पणी ऐसे समय में आयी है, जब कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने प्रेसवार्ता में एसडीपीआई के समर्थन के बारे में बार-बार पूछे जाने वाले सवालों पर नाराजगी व्यक्त की थी।

भाषा

राजकुमार दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में