Kanker Villagers Protest Chhattisgarh : आश्वासनों से टूटा भरोसा! मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर 68 गांवों के ग्रामीणों का बड़ा आंदोलन, सरकारी दफ्तरों में जड़े ताले, इन मांगों पर अड़े ग्रामीण
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में 68 गांवों के लोगों ने मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया है। नाराज ग्रामीणों ने कई सरकारी दफ्तरों में ताले जड़ दिए, जिससे प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो गया है। पहले मिले आश्वासन के बावजूद मांगें पूरी न होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
Kanker Villagers Protest Chhattisgarh / Image Source : SCREENGRAB
- कांकेर जिले के 68 गांवों के लोगों ने एकजुट होकर किया बड़ा आंदोलन।
- नाराज ग्रामीणों ने सरकारी दफ्तरों में लगाए ताले।
- 7 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई न होने से बढ़ा आक्रोश।
कांकेर : Kanker Villagers Protest Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर ग्रामीणों के सब्र का बांध पूरी तरह टूट गया है। मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर 68 गांवों के ग्रामीण एकजुट होकर सड़क पर उतर आए हैं। ग्रामीणों ने अपना विरोध दर्ज कराते हुए क्षेत्र के सरकारी दफ्तरों में ताले जड़ दिए हैं। ग्रामीणों के इस कदम से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है और मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
प्रदर्शन के दौरान प्रशासन ने मांग पूरा करने दिया था आश्वासन
मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीण पहले भी अपनी 7 सूत्रीय मांगों को लेकर पहले भी बड़े स्तर पर प्रदर्शन कर चुके हैं। Kanker 7 Point Demands Protest पिछले प्रदर्शन के दौरान प्रशासन ने उनकी सभी मांगों को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया था लकिन ग्रामीणों का आरोप है कि आश्वासन के बाद भी मांगें पूरी नहीं हुईं।
Pakhanjur School Shift Dispute स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय को लेकर भी लगाया आरोप
इसके अलावा, ग्रामीणों में स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय को लेकर भी नाराजगी है। उनका आरोप है कि ब्लॉक मुख्यालय के नाम पर इस स्कूल को पखांजूर शिफ्ट कर दिया गया है। बता दें की ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक उनकी सभी 7 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई नहीं होती और स्कूल को वापस नहीं लाया जाता, तब तक वह प्रदर्शन करेंग। फिलहाल मौके पर प्रशासन ग्रामीणों को समझाने-बुझाने की कोशिशों में जुटा है।
2 फरवरी को भी किया था प्रदर्शन
दरअसल, यह गुस्सा अचानक नहीं फूटा है। इसके पीछे वर्षों की नाराजगी और उपेक्षा छिपी हुई है। 2 फरवरी 2026 को भी कोइलीबेड़ा में इसी तरह का बड़ा जनआंदोलन हुआ था। तब 18 पंचायतों के 68 गांवों के ग्रामीण अपनी 7 सूत्रीय मांगों को लेकर सड़क पर उतरे थे। उस समय प्रशासन ने मांगों को जल्द पूरा करने का आश्वासन देकर आंदोलन खत्म जरूर करवा दिया था, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि वह आश्वासन सिर्फ शब्दों तक सीमित रह गया।
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