विश्व पुस्तक मेले में सशस्त्र बलों की विरासत और सैन्य साहित्य को प्रमुखता
विश्व पुस्तक मेले में सशस्त्र बलों की विरासत और सैन्य साहित्य को प्रमुखता
नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 53वें नयी दिल्ली विश्व पुस्तक मेले (एनडीडब्ल्यूबीएफ)-2026 के प्रमुख आकर्षणों में सैन्य विरासत, रक्षा साहित्य और सैन्य उपकरण प्रदर्शनियां शामिल हैं। यह मेला भारतीय सशस्त्र बलों की विरासत और ‘शांति के लिए युद्ध’ विषय पर विशेष जोर देते हुए फिलहाल जारी है।
भारतीय सेना का 1,000 वर्ग फुट में फैला पवेलियन एक गहन अनुभव प्रदान करने के लिए परिकल्पित किया गया है, जिसमें अभिलेखीय रिकॉर्ड और प्रत्यक्ष विवरण को रखा गया है।
यह पवेलियन एक लड़ाकू बल और राष्ट्रीय पहचान के आधार स्तंभ के रूप में सेना की यात्रा को दर्शाता है और आगंतुकों को पढ़ने, श्रव्य सामग्री और प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से इतिहास का अन्वेषण करने के लिए आमंत्रित करता है।
मेले के इस संस्करण का उद्देश्य राष्ट्र निर्माण में भारतीय सशस्त्र बलों की भूमिका को उजागर करना और सैन्य सेवा को कर्तव्य, संयम और शांति की खोज के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करना है।
नेशनल बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया (एनबीटी) के अध्यक्ष प्रोफेसर मिलिंद सुधाकर मराठे ने कहा, ‘‘भारतीय सेना का 1,000 वर्ग फुट में विस्तृत मंडप राष्ट्र निर्माण में सशस्त्र बलों की भूमिका को उजागर करने और सैन्य सेवा को कर्तव्य, संयम और शांति के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में प्रस्तुत करने के हमारे प्रयास को दर्शाता है। साथ ही यह युवा पीढ़ियों को युद्धक्षेत्र से परे इस विरासत से जुड़ने में मदद करता है।’’
इस मेले का मुख्य आकर्षण भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना पर 500 से अधिक पुस्तकों का विशाल संग्रह है। इनमें सैन्य इतिहास, जीवनी, संस्मरण और रणनीतिक अध्ययन से संबंधित पुस्तकें शामिल हैं, जो पाठकों को नेतृत्व, सेवा और राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में गहन जानकारी प्रदान करती हैं।
साहित्य के अलावा, प्रदर्शनी में सीमावर्ती क्षेत्र में तैनाती में इस्तेमाल होने वाले वास्तविक सैन्य उपकरण भी प्रदर्शित किए गए हैं। प्रमुख आकर्षणों में अर्जुन टैंक और विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत की विस्तृत प्रतिकृति शामिल हैं, जिन्होंने जनता का भरपूर ध्यान आकर्षित किया।
इस मेले में रक्षा संबंधी 100 से अधिक वार्ताएं, पैनल चर्चाएं और पुस्तक विमोचन कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें पूर्व सैनिकों, इतिहासकारों और लेखकों की भागीदारी होगी।
वर्ष 2026 का यह मेला पहली बार जनता के लिए निःशुल्क है जिसमें 35 से अधिक देशों के प्रतिभागी, 1,000 प्रकाशक, 3,000 से अधिक स्टॉल, 600 कार्यक्रम और 1,000 वक्ता शामिल हैं, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े साहित्यिक उत्सवों में से एक बनाते हैं।
भाषा संतोष नरेश
नरेश

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