चर्च और स्थानीय लोगों की आपत्तियों की वजह से शराब की वैध दुकानें बंद नहीं कराई जा सकतीं: अदालत

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चर्च और स्थानीय लोगों की आपत्तियों की वजह से शराब की वैध दुकानें बंद नहीं कराई जा सकतीं: अदालत

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  • Publish Date - July 28, 2026 / 06:31 PM IST,
    Updated On - July 28, 2026 / 06:31 PM IST

शिलांग, 28 जुलाई (भाषा) मेघालय उच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी कि चर्च के वरिष्ठ पदाधिकारियों और स्थानीय लोगों की नैतिक आपत्तियों के आधार पर, राज्य के आबकारी नियमों का पालन करने वाली और कानूनी रूप से लाइसेंस-प्राप्त शराब की दुकान को संचालित करने से नहीं रोका जा सकता।

एक दुकान की मालकिन की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एच.एस. थांगखियू ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह पश्चिम गारो हिल्स जिले के डनाकग्रे में भारत में निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल) की खुदरा बिक्री दुकान को संचालित करने की अनुमति दें।

उच्च न्यायालय ने सोमवार को दिये अपने आदेश में कहा कि दुकान मालकिन जेंगजल मार्केट से दुकान हटाने के लिए सभी कानूनी जरूरतों को पूरा कर लिया था।

याचिकाकर्ता ने स्थानीय ‘नोकमा’ या ग्राम प्रमुख से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी)प्राप्त कर लिया था, जनवरी 2025 में दुकान को स्थानांतरित करने के लिए आबकारी विभाग से अनुमति ले ली थी और उनके पास वैध लाइसेंस भी था।

महिला याचिकाकर्ता ने हालांकि अपनी याचिका में आरोप लगाया कि स्थानीय चर्च के पदाधिकारियों और विकास समिति के सदस्यों की आपत्तियों के बाद आबकारी अधीक्षक ने उन्हें दुकान बंद करने का निर्देश दिया।

अदालत ने रेखांकित किया कि धिकारियों की जांच में मेघालय आबकारी अधिनियम और नियमों का कोई उल्लंघन नहीं पाया गया और इस बात की पुष्टि हुई कि यह दुकान धार्मिक उपासना स्थलों, शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों से अनिवार्य 200 मीटर की दूरी से अधिक दूर स्थित था।

एकल पीठ ने फैसले में माना कि प्रतिवादियों की दुकान को बंद कराने और लाइसेंस रद्द कराने के लिए दर्ज आपत्तियां ‘‘कानूनी या अन्य ठोस आधारों के बजाय नैतिक आधारों पर’’ आधारित थीं।

भाषा धीरज दिलीप

दिलीप