शराब घोटाला मामला: चैतन्य बघेल को दी गयी जमानत के खिलाफ छत्तीसगढ़ की याचिका पर सुनवाई स्थगित
शराब घोटाला मामला: चैतन्य बघेल को दी गयी जमानत के खिलाफ छत्तीसगढ़ की याचिका पर सुनवाई स्थगित
नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को छत्तीसगढ़ सरकार की उस अपील पर सुनवाई स्थगित कर दी, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को कथित शराब घोटाले के मामलों में दी गयी जमानत को चुनौती दी गई थी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी और बघेल का प्रतिनिधित्व कर रहे मुकुल रोहतगी की दलीलों पर गौर करने के बाद सुनवाई स्थगित कर दी।
जेठमलानी ने आरोप लगाया कि बघेल इस सनसनीखेज मामले में प्रमुख आरोपियों और साजिशकर्ताओं में से एक थे।
रोहतगी ने दलील दी कि इस मामले की जांच दो साल से जारी थी और उच्च न्यायालय ने इस मामले में सोच-विचार कर फैसला सुनाया है।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य में कथित शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में दो जनवरी को चैतन्य बघेल को जमानत दे दी थी।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकल पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज एक मामले और छत्तीसगढ़ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी)/आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की ओर से दर्ज एक अन्य मामले में चैतन्य की जमानत याचिकाएं स्वीकार कर लीं।
ईडी के मामले में जमानत याचिका पर अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता की कथित भूमिका उन कई प्रमुख आरोपियों की तुलना में ‘‘काफी कम’’ थी, जिन्हें पहले ही जमानत दी जा चुकी है।
इसने कहा कि कथित सरगना एवं प्रमुख लाभार्थी अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, अरुणपति त्रिपाठी और त्रिलोक सिंह ढिल्लों को उच्चतम न्यायालय द्वारा पहले ही जमानत पर रिहा कर दिया गया है और आवेदक को जमानत देने से इनकार करना समानता के सुस्थापित सिद्धांत का उल्लंघन होगा।
उच्च न्यायालय ने पाया कि जांच मुख्य रूप से दस्तावेजी प्रकृति की थी और चैतन्य काफी समय से हिरासत में थे।
अदालत ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा एकत्र की गई सामग्री, यथा- धनशोधन निवारण कानून (पीएमएलए) की धारा 50 के अंतर्गत दर्ज बयान तथा वित्तीय और डिजिटल अभिलेख, की सत्यता और प्रमाणिकता की जांच मुकदमे की सुनवाई के दौरान की जाएगी। अदालत ने यह भी कहा कि जमानत के स्तर पर इन साक्ष्यों का अंतिम और निर्णायक मूल्यांकन नहीं किया जा सकता।
एसीबी/ईओडब्ल्यू मामले में जमानत देने के एक अलग आदेश में उच्च न्यायालय ने इसे ‘‘कानून का गंभीर उल्लंघन’’ करार दिया और कहा कि जांच अधिकारी विशेष अदालत द्वारा जारी किए गए स्थायी/अनिश्चितकालीन वारंट के बावजूद लक्ष्मी नारायण बंसल (मामले में एक आरोपी) को गिरफ्तार करने में विफल रहे।
ईडी ने कथित घोटाले में धनशोधन की जांच के सिलसिले में पिछले साल 18 जुलाई को चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था, जबकि एसीबी/ईओडब्ल्यू ने भ्रष्टाचार जांच से जुड़े अपने मामले में 24 सितंबर को जेल में रहते हुए ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।
ईडी के अनुसार, राज्य में शराब घोटाला 2019 और 2022 के बीच उस समय हुआ था जब छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी।
भाषा सुरभि सुरेश
सुरेश

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