मप्र : कान्हा अभयारण्य में बाघिन और शावक की मौत, प्रदेश में इस वर्ष कुल 27 बाघों की जान गई

मप्र : कान्हा अभयारण्य में बाघिन और शावक की मौत, प्रदेश में इस वर्ष कुल 27 बाघों की जान गई

मप्र : कान्हा अभयारण्य में बाघिन और शावक की मौत, प्रदेश में इस वर्ष कुल 27 बाघों की जान गई
Modified Date: April 30, 2026 / 11:50 am IST
Published Date: April 30, 2026 11:50 am IST

मंडला/भोपाल, 30 अप्रैल (भाषा) मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व (केटीआर) में एक बाघिन और उसके शावक की मौत हो गई। इसके साथ ही राज्य में इस वर्ष अब तक बाघों की मौत का आंकड़ा 27 हो गया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

वन्यजीव चिकित्सक डॉ. संदीप अग्रवाल ने बताया कि आठ से दस वर्ष के आयु वर्ग की बाघिन और करीब 18 महीने का उसका शावक केटीआर के ‘पृथक केंद्र’ में उपचाराधीन थे। दोनों की बुधवार को इलाज के दौरान मौत हो गई।

उन्होंने बताया कि बाघिन के तीन अन्य शावकों की 21 से 25 अप्रैल के बीच प्राकृतिक कारणों, डूबने और फेफड़ों के संक्रमण से मौत हो चुकी थी। बाघिन और उसके चौथे शावक को गत सप्ताह सरही रेंज से बचाकर ‘पृथक केंद्र’ लाया गया था, जहां उनकी भी मृत्यु हो गई।

धिकारियों के अनुसार, बाद में दोनों का पोस्टमार्टम किया गया और निर्धारित प्रक्रिया के तहत शवों का निपटान किया गया।

र्ष 2022 की गणना के अनुसार, मध्यप्रदेश में 785 बाघ हैं, जो देश में सर्वाधिक संख्या है। राज्य में नौ टाइगर रिजर्व हैं।

अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष बाघ की पहली मौत सात जनवरी को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में दर्ज की गई थी। इसके बाद से अब तक शावकों सहित 26 अन्य बाघों की मौत हो चुकी है।

अधिकारियों ने बताया कि इनमें दो अप्रैल के बाद से अब तक 12 बाघ की मौत हो चुकी है जिनमें चार शावक शामिल हैं।

कान्हा के वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने बताया कि ताजा घटनाओं के साथ राज्य में बाघों की मौत का आंकड़ा 27 हो गया है।

उन्होंने दावा किया कि टाइगर रिजर्व के रेंजर और निचले स्तर का स्टाफ अक्सर दूर शहरों में रहता है, जिससे क्षेत्र में सख्त निगरानी नहीं हो पाती।

दुबे ने कहा कि ग्रामीण महुआ, चिरौंजी और तेंदूपत्ता संग्रह के लिए अवैध रूप से अपने कुत्तों को जंगल में ले जाते हैं, जिससे बाघों में संक्रमण का खतरा बढ़ता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के निर्देशों के बावजूद टाइगर रिजर्व के पांच किलोमीटर दायरे में कुत्तों, गायों, बैलों और बकरियों का टीकाकरण गंभीरता से नहीं किया जाता, जिसके कारण ‘कैनाइन डिस्टेंपर वायरस’ (सीडीवी) फैलता है और उसके संक्रमण से बाघों की मौत होती है।

भाषा सं दिमो मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में