बांधवगढ़-अचानकमार बाघ गलियारे के पास मप्र की चौथी कोयला खनन परियोजना को मिली मंजूरी
बांधवगढ़-अचानकमार बाघ गलियारे के पास मप्र की चौथी कोयला खनन परियोजना को मिली मंजूरी
( आलिंद चौहान )
नयी दिल्ली, 23 सितंबर (भाषा) मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में बांधवगढ़ बाघ संरक्षित क्षेत्र और अचानकमार वन्यजीव अभयारण्य को जोड़ने वाले एक बाघ गलियारे (टाइगर कॉरिडोर) के समीप भूमिगत कोयला खनन परियोजना को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के विशेषज्ञ पैनल से एक महत्वपूर्ण मंजूरी मिल गई है।
इस साल जुलाई के बाद से बांधवगढ़-अचानकमार बाघ गलियारे के पास मंजूरी पाने वाली यह चौथी कोयला खनन परियोजना है। नयी परियोजना ‘वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ) अंडरग्राउंड कोल माइन’ में परिचालन से जुड़ी है, जो बाघ गलियारे से महज छह किलोमीटर से कुछ अधिक दूरी पर स्थित है।
यह निर्णय 8-9 सितंबर को हुई विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) की बैठकों के दौरान लिया गया।
इससे पहले, बाघ गलियारे से क्रमशः 1.5 किलोमीटर, 53 मीटर और 3.9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पथोरा ईस्ट अंडरग्राउंड कोल माइनिंग ब्लॉक (सोहागपुर कोयला क्षेत्र), मारवाटोला सात कोल ब्लॉक और अर्जुन वेस्ट कोल ब्लॉक में खनन को मंजूरी दी जा चुकी है।
बाघ गलियारे जैव विविधता को बनाए रखने, बाघों की आबादी के बीच अंतःप्रजनन (इंटरब्रीड) को सक्षम बनाने तथा वनस्पतियों और जीवों के आवागमन को सुगम बनाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के 2014 के एक दस्तावेज के अनुसार, यह गलियारा कान्हा-पेंच बाघ आबादी को बांधवगढ़-संजय-दुबरी आबादी से जोड़ता है और पारिस्थितिकी के नजरिये से इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
इस क्षेत्र में कोयले की उपलब्धता के कारण खनन से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास का लगातार दबाव बना रहता है।
मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति के विवरण के अनुसार, जेके सीमेंट लिमिटेड द्वारा संचालित की जाने वाली ‘वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ) अंडरग्राउंड कोल माइन’ का खनन पट्टा क्षेत्र 1,400 हेक्टेयर से अधिक है, जिसमें 960 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि शामिल है।
हालांकि, भूमिगत खनन होने के कारण केवल 19 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित होगी, लेकिन इस प्रकार के खनन से जमीन धंसने का खतरा रहता है, जिससे सतह की स्थलाकृति बदल सकती है और आर्द्रभूमि व जंगलों को नुकसान पहुंच सकता है।
परियोजना की पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस परियोजना स्थल पर स्लॉथ बीयर (भालू), बाघ, तेंदुआ, आम जंगली बिल्ली और धारीदार लकड़बग्घा सहित अनुसूची-एक की 29 प्रजातियां मौजूद हैं, जिन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत उच्च प्राथमिकता वाला संरक्षण प्राप्त है।
विशेषज्ञ समिति ने कुछ शर्तों और दस्तावेजों को प्रस्तुत करने के आधार पर इस परियोजना को पर्यावरण मंजूरी (ईसी) देने की सिफारिश की है। इसमें मंत्रालय की वन सलाहकार समिति (एफएसी) से वन भूमि के उपयोग के लिए प्रथम चरण की (सैंद्धांतिक तौर पर) मंजूरी प्राप्त करना शामिल है।
भाषा मनीषा संतोष
संतोष

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