महाराष्ट्र के व्यक्ति का जाति प्रमाण-पत्र रद्द करने का फैसला बरकरार, सेवानिवृत्ति लाभ सुरक्षित

महाराष्ट्र के व्यक्ति का जाति प्रमाण-पत्र रद्द करने का फैसला बरकरार, सेवानिवृत्ति लाभ सुरक्षित

महाराष्ट्र के व्यक्ति का जाति प्रमाण-पत्र रद्द करने का फैसला बरकरार, सेवानिवृत्ति लाभ सुरक्षित
Modified Date: September 3, 2026 / 09:32 pm IST
Published Date: September 3, 2026 9:32 pm IST

नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें एक व्यक्ति के ‘टोकरे कोली’ अनुसूचित जनजाति (एसटी) से होने के दावे को अमान्य कर दिया गया था।

शीर्ष अदालत ने, साथ ही यह भी आदेश दिया कि वह (व्यक्ति) सेवानिवृत्ति और पेंशन लाभों का हकदार होगा।

उस व्यक्ति को 1984 में एक जाति प्रमाण-पत्र जारी किया गया था, जिसमें उसे ‘टोकरे कोली’ अनुसूचित जनजाति का सदस्य बताया गया था। इसी प्रमाण-पत्र के आधार पर उसने अक्टूबर 1994 में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में कनिष्ठ अभियंता (सिविल) के पद पर नौकरी हासिल की थी। वह जून 2025 में नौकरी से सेवानिवृत्त हुआ।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अक्टूबर 1994 से जून 2025 तक की उस व्यक्ति की सेवा को, लागू सेवा नियमों के अनुसार उसकी सेवानिवृत्ति और पेंशन से जुड़े लाभों की गणना और भुगतान के सीमित उद्देश्य के लिए सुरक्षित माना जाएगा।

पीठ ने कहा, ‘‘यह स्पष्ट किया जाता है कि यहां दी गई सुरक्षा अपीलकर्ता के ‘टोकरे कोली’ अनुसूचित जनजाति से संबंधित दावे की पुष्टि या मान्यता के समान नहीं होगी।’’

इसमें कहा गया है कि न तो अपीलकर्ता और न ही उसके परिवार का कोई सदस्य अमान्य जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर भविष्य में किसी लाभ का दावा करने का हकदार होगा।

शीर्ष अदालत ने मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा सितंबर 2020 में पारित आदेश को चुनौती देने वाले व्यक्ति द्वारा दायर अपील पर अपना फैसला सुनाया।

उच्च न्यायालय ने अनुसूचित जनजाति प्रमाण-पत्र जांच समिति द्वारा पारित जुलाई 2020 के आदेश की पुष्टि की थी, जिसमें अपीलकर्ता के ‘टोकरे कोली’ अनुसूचित जनजाति से संबंधित जाति के दावे को अमान्य कर दिया गया था।

शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि चूंकि अपीलकर्ता सेवानिवृत्त हो चुका है, इसलिए उसके वकील ने वैकल्पिक रूप से सेवानिवृत्ति और पेंशन संबंधी लाभों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना की है।

पीठ ने कहा, ‘‘हमें जांच समिति के निष्कर्ष और उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये फैसले में कोई त्रुटि नहीं मिली।’’

भाषा

सुरेश माधव

माधव


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