महुआ ने अपनी याचिका में पक्षकार बनाये गए कई मीडिया संस्थानों को इससे हटाने का अदालत से अनुरोध किया
महुआ ने अपनी याचिका में पक्षकार बनाये गए कई मीडिया संस्थानों को इससे हटाने का अदालत से अनुरोध किया
नयी दिल्ली, 31 अक्टूबर (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा ने अपने खिलाफ कथित फर्जी और अपमानजनक सामग्री के प्रसारण के विरुद्ध दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर अपनी याचिका में पक्षकार बनाये गए कई मीडिया संस्थानों को इससे हटाने का मंगलवार को अनुरोध किया।
मोइत्रा के वकील ने कहा कि वह इस समय किसी तरह की अंतरिम राहत पर जोर नहीं दे रहे हैं। उन्होंने न्यायमूर्ति सचिन दत्ता को बताया कि मुकदमा सिर्फ दो प्रतिवादियों – भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के निशिकांत दुबे और वकील जय अनंत देहाद्रई के खिलाफ जारी रहेगा।
मोइत्रा के वकील ने कहा कि प्रतिवादी संख्या 3 से लेकर 20 तक, जो मीडिया संस्थान हैं, को हटाया जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘हम अभी अंतरिम राहत के लिए जोर नहीं दे रहे हैं।’’
हटाये गए पक्षकारों में सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’, ‘गूगल’ और ‘यूट्यूब’ भी शामिल हैं।
दुबे ने मोइत्रा पर संसद में सवाल पूछने के लिए एक उद्योगपति से रिश्वत लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मोइत्रा के खिलाफ आरोपों पर गौर करने के लिए जांच समिति का गठन करने का अनुरोध किया था।
वकील देहाद्रई से मिले एक पत्र का हवाला देते हुए दुबे ने कहा है कि उन्होंने (देहाद्रई) एक उद्योगपति द्वारा तृणमूल कांग्रेस नेता को कथित तौर पर रिश्वत दिए जाने के ‘‘ठोस’’ सबूत साझा किए हैं।
लोकसभा अध्यक्ष को लिखे अपने पत्र में दुबे ने दावा किया कि हाल में, खासकर अमेरिकी कंपनी ‘हिंडनबर्ग रिसर्च’ की एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट के बाद लोकसभा में उनके (मोइत्रा के) द्वारा पूछे गए 61 प्रश्नों में से 50 प्रश्न (गौतम) अडाणी समूह पर केंद्रित थे, जिस कारोबारी समूह पर तृणमूल कांग्रेस सांसद अक्सर कदाचार का आरोप लगाती रही हैं।
उच्च न्यायालय में अपनी याचिका में, मोइत्रा ने इन आरोपों से इनकार किया है और दावा किया कि ये उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए गढ़े गए हैं।
अदालत ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस सांसद को दुबे और देहाद्रई को छोड़कर सभी प्रतिवादियों को हटाने की उनकी (मोइत्रा की) इच्छा के मद्देनजर पक्षकारों के संबंध में एक संशोधित ‘मेमो’ दाखिल करने, और विषय में पक्षकारों में उपयुक्त बदलाव करने की भी अनुमति दे दी।
दुबे की ओर से पेश वकील अभिमन्यु भंडारी ने दलील दी कि मोइत्रा ने झूठी गवाही दी है क्योंकि अपने खिलाफ सभी आरोपों से इनकार करने के बाद उन्होंने एक कारोबारी के साथ अपनी ‘लॉगिन’ संबंधी गोपनीय जानकारी साझा करने की बात स्वीकार कर ली है।
अदालत ने मामले को दिसंबर में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से लोकसभा सदस्य ने इस महीने की शुरुआत में दायर अपनी याचिका में दुबे, देहाद्रई, सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’, ‘सर्च इंजन गूगल’, ‘यूट्यूब’ और 15 मीडिया संस्थानों के खिलाफ स्थायी रोक लगाने का अनुरोध किया था। साथ ही, अदालत से यह भी आग्रह किया था कि इन संस्थानों को उनके खिलाफ मानहानिकारक, प्रथम दृष्टया झूठे और दुर्भावनापूर्ण बयान गढ़ने, प्रकाशित, प्रसारित करने से रोका जाए। इसके अलावा, उन्होंने क्षतिपूर्ति की भी मांग की है।
भाषा सुभाष नरेश
नरेश

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